'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेता अभिजीत दीपके सरकार के खिलाफ लगातार बुलंद आवाज उठा रहे हैं। उन्हें रोकने की और बदनाम करने की लाखों कोशिशें हो चुकी हैं, बावजूद इसके वो शांति से विरोध प्रदर्शन कर लोगों को अपने साथ जोड़ रहे हैं। अभिजीत दीपके का कहा गया एक-एक शब्द इस वक्त लोगों का ध्यान खींच रहा है। ऐसे में अब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक जरूरी संदेश देश के साथ शेयर किया है। इस मैसेज में उन्होंने 'कॉकरोच जनता पार्टी' की तरफ से सफाई दी है और साथ ही सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
अभिजीत दीपके ने सरकार पर लगाया आरोप
अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर एक नोट शेयर करते हुए लिखा, 'बिजनेस शांतिपूर्वक प्रोटेस्ट से प्रभावित नहीं हो रहे। ये प्रभावित होते हैं जब सरकार पूरे शहर को बंद करने का फैसला लेती है, इंटरनेट सर्विस बंद करती है और अपने ही नागरिकों की आवाजाही को सीमित कर शहर को वॉर जोन में बदल देती है। शुरुआत से ही कॉकरोच जनता पार्टी का मानना है कि हम हमेशा गांधी जी के शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलेंगे और हम इस वादे पर कायम हैं। हमने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में प्रोटेस्ट किए हैं और हर एक पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा है।'
खुद पर हुए हमले का किया जिक्र
अभिजीत दीपके ने खुद पर हुए हमले का जिक्र करते हुए लिखा, 'जयपुर में मुझ पर हमला हुआ, लेकिन तब भी मैंने पलटवार नहीं किया क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देना हमारे सिद्धांतों के खिलाफ चला जाता। हम शारीरिक बल का सहारा लेने की जगह डॉ.बी.आर. अंबेडकर की लीडरशिप में तैयार किए गए कांस्टीट्यूशन से मिले अधिकारों का इस्तेमाल करना करना पसंद करेंगे। हमारी ताकत कांस्टीट्यूशनल वैल्यू के लिए हमारी कमिटमेंट से आती है और कितना भी उकसाया जाए हम इन्हें नहीं छोड़ेंगे। हम चुप नहीं रहते इसलिए हमें अराजकतावादी दिखाने की लगातार कोशिशें की जाती हैं। लेकिन सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं है, अन्याय के खिलाफ सड़कों पर प्रोटेस्ट करना अराजकता नहीं है और पब्लिक ऑफिस में बैठे लोगों से सवाल करना तो बिल्कुल भी अराजकता नहीं है। ये डेमोक्रेसी के सबसे फंडामेंटल एक्सप्रेशन हैं।
अभिजीत दीपके ने BJP पर उठाया सवाल
अभिजीत दीपके ने आखिर में लिखा, 'आज जो पार्टी पावर में है, उसने विपक्ष में रहते हुए दशकों तक प्रोटेस्ट ऑर्गनाइज किए, सड़कों पर उतरकर सरकारों से सवाल पूछे। अगर उन पर भी वैसी ही पाबंदियां लगतीं, उन्हें डराया-धमकाया जाता और पुलिस की सख्ती का सामना करना पड़ता, तो आज सत्ता में बैठे कई लोग शायद वहां पहुंच ही नहीं पाते। ये दोगलापन है कि जब आप विपक्ष में हों तो प्रोटेस्ट को लोकतांत्रिक अधिकार मानकर उसका जश्न मनाओ और जब सत्ता में आओ तो उसी को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानने लगो। हम कोई स्पेशल ट्रीटमेंट है मांग रहे। हम उन अधिकारों का इस्तेमाल करने की बात कर रहे हैं, जो हर नागरिक को मिले हुए हैं, चाहे पावर में कोई भी पार्टी हो।'