फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट AI2030 में हाईजैक अलर्ट मिलने के मामले में अब तक इसकी वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। 14 अक्टूबर को विमान के ट्रांसपोंडर से हाईजैक से जुड़ा कोड 7500 मिलने के बाद विमान को जयपुर डायवर्ट कर दिया गया था। विमान में 306 लोग सवार थे। सभी यात्रियों और क्रू सदस्यों की सुरक्षा जांच की गई और विमान को आगे की उड़ान के लिए मंजूरी दे दी गई। अब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) समेत संबंधित एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि अलर्ट कैसे जारी हुआ।

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि रिपोर्टों के मुताबिक, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क करने पर पायलटों ने विमान में सब कुछ सामान्य होने की जानकारी दी थी। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पायलटों ने कोड सक्रिय करने से इनकार किया। ऐसे में तकनीकी गड़बड़ी, सिस्टम से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आशंका की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी एक वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

क्या होता है स्क्वॉक कोड 7500?

विमान में लगा ट्रांसपोंडर एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमान की पहचान और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करता है। स्क्वॉक कोड 7500 का इस्तेमाल विमान में हाईजैक या गैरकानूनी हस्तक्षेप की स्थिति का संकेत देने के लिए किया जाता है। इस कोड का संकेत मिलने पर सुरक्षा एजेंसियां मामले को गंभीरता से लेती हैं। भले ही पायलट सामान्य स्थिति की जानकारी दें, लेकिन निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत विमान की जांच करना जरूरी होता है। इसी प्रोटोकॉल के तहत एअर इंडिया की फ्लाइट को जयपुर में उतारने का फैसला लिया गया।

पायलटों ने कोड दबाने से किया इनकार

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल को विमान से कोड 7500 मिलने का संकेत मिला था। अधिकारियों ने पायलटों से संपर्क किया तो उन्होंने विमान में सब कुछ सामान्य होने की बात कही। इसके बावजूद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए दिल्ली आ रही फ्लाइट को जयपुर डायवर्ट कर दिया गया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में पायलटों के हवाले से दावा किया गया है कि उन्होंने जानबूझकर यह इमरजेंसी कोड एक्टिव नहीं किया था। इसी वजह से अब जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि संकेत विमान से भेजा गया था या किसी तकनीकी अथवा सिस्टम संबंधी कारण से ATC तक पहुंचा।

नए ATC सिस्टम पर भी उठे सवाल

इस घटना के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल की तकनीकी प्रणाली को लेकर भी सवाल उठे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विमानन क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों ने मुंबई ATC के सिस्टम की भूमिका की जांच किए जाने की बात कही है। वहीं, अनुभवी पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों ने अलग-अलग संभावनाओं पर अपनी राय दी है। अभी तक किसी तकनीकी खराबी को घटना का कारण घोषित नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि कोड 7500 का संकेत आखिर किस स्तर पर उत्पन्न हुआ। जांच पूरी होने के बाद ही इस सवाल का जवाब मिल सकेगा।

जयपुर में विमान की तलाशी, सभी यात्री सुरक्षित

हाईजैक अलर्ट के बाद विमान को जयपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारकर आइसोलेशन बे में ले जाया गया। इसके तुरंत बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने विमान, यात्रियों के सामान और कार्गो हिस्से की सघन जांच की। यात्रियों की भी सुरक्षा जांच की गई। जांच के दौरान किसी वास्तविक हाईजैक की पुष्टि नहीं हुई। एअर इंडिया ने कहा कि विमान और क्रू को संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से मंजूरी मिल गई है। यात्रियों को दोबारा विमान में बैठाया गया और उड़ान दिल्ली के लिए रवाना हुई। विमान बाद में सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया।

DGCA की जांच से खुलेगा मामला

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने घटना की जांच शुरू की है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कोड 7500 का संकेत कैसे मिला और क्या इसमें किसी तकनीकी प्रणाली, संचार प्रक्रिया या मानवीय त्रुटि की भूमिका थी। फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर किसी खतरे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अलर्ट जारी होने की वजह अब भी स्पष्ट नहीं है। जांच एजेंसियों के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि यह सुरक्षा संकेत कैसे उत्पन्न हुआ और इसके लिए कौन-सा कारण जिम्मेदार था।