बिहार की राजनीति में छोटे सरकार के नाम से पहचाने जाने वाले अनंत सिंह पर गाज गिरी है।। मोकामा से जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने उन पर दल विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया है। अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए भी तत्काल स्पीकर को पत्र भेज दिया है।

छह बार के विधायक हैं अनंत सिंह

अनंत सिंह मोकामा से छह बार से विधायक हैं। वे 2005 से मोकामा से चुनाव जीतते आ रहे हैं। जेडीयू में शामिल होने से पहले वह आरजेडी और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी अपना दबदबा कायम रखे हुए हैं।

 अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी और मोकामा से पूर्व विधायक नीलम देवी को भी पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अनंत सिंह के जेल में रहने के दौरान नीलम देवी विधायक थी। 2022 में एक आपराधिक मामले में सज़ा होने के कारण उनकी सदस्यता रद्द हो गई थी। तब नीलम देवी ने ही उपचुनाव जीता था। बाद में नवंबर, 2025 में अनंत सिंह ने मोकामा से भारी मतों से जीत हासिल की थी।

नीलम देवी ने बचाई थी नीतीश सरकार

 दिलचस्प बात यह है कि नीलम देवी ने तेजस्वी यादव का साथ छोड़ कर विधायक रहते जेडीयू की सरकार बचाई थी। जब जनवरी, 2024 में महागठबंधन छोड़ कर नीतीश कुमार ने बीजेपी से मिल कर राज्य में एनडीए की सरकार बनाई थी। तब फरवरी, 2024 में नीतीश सरकार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना पड़ा था। समझा जा रहा था कि महागठबंधन नीतीश कुमार सरकार को गिराने में सफल हो सकता है। तब मोकामा से आरजेडी विधायक नीलम देवी ने तेजस्वी यादव का साथ छोड़ कर नीतीश सरकार का साथ दिया था। नीलम देवी विधानसभा कार्यवाही शुरू होते ही आरजेडी विधायक दल का साथ छोड़ एनडीए विधायक दल के सदस्यों के साथ जा कर बैठ गई थीं। साथ ही आरजेडी के दो औऱ विधायकों ने नीतीश के समर्थन में मत दिया था। सरकार बचाने के लिए 122 वोटों की जरूरत थी, लेकिन नीतीश 129 विधायकों का समर्थन जुटाने मं कामयाब हो गए। तब यही माना गया था तेजस्वी के साथ खेला हो गया।  

बगावत की वजह

 अनंत सिंह पर विधान परिषद चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी का विरोध करते हुए जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का खुल कर समर्थन किया था। अनंत सिंह वर्तमान एमएलसी औऱ जेडीयू के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार को दोबारा टिकट दिए जाने की मुखालिफत कर रहे थे। लेकिन पार्टी के अनसुना करने पर उन्होंनें अनुज सिंह के लिए खुल कर प्रचार किया। हाल ही में कहा था कि वह अनुज सिंह की विजय पर एक लाख लड्डू बनवा रहे हैं। लेकिन जेडीयू ने अनंत सिंह का स्वाद पहले ही बिगाड़ दिया।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अपने आदेश मे अनंत सिंह पर शीर्ष नेतृत्व के लिए अभद्र औऱ अमर्यादित भाषा इस्तेमाल करने के लिए छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।

 यह दूसरा मौका है जब अनंत सिंह को जेडीयू से बाहर निकाला गया है। इससे पहले भी उन्हें पुटुस हत्याकांड में आरोपी होने के कारण पार्टी से निकाला गया था। जेडीयू ने उनकी जगह नीरज कुमार को  2015 में विधायकी का टिकट दे दिया था। नीरज कुमार से अनंत सिंह के बीच तब से सियासी रंजिश चल रही है। हालांकि अनंत सिंह जेल में रहते हुए निर्दलीय चुनाव जीत गए थे।

नीतीश पर विवादित बयान

अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को अपनी वफादारी याद दिलाने के लिए एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि जब नीतीश कुमार इधर-उधर घूमते थे तब उन्होंने उनका न सिर्फ साथ दिया था बल्कि उनके साथ रहते 9 हत्याएं कराई थी। लेकिन पार्टी से दबाव पड़ने पर अनंत सिंह बयान से पलट गए। अनंत सिंह ने कहा कि जब लालू सरकार थी तब उन्होंने अपने 9 साथी खोए थे। लेकिन पार्टी ने बयान से पलटने पर भी उन्हें नहीं बख्शा।

 अनंत सिंह की विधायकी रद्द करने के लिए बिहार विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार को पत्र लिख कर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है।

अनंत सिंह के साथ के साथ उनकी पत्नी औऱ पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

आखिरी मौके तक बीच-बचाव की कोशिश

अनंत सिंह को निष्कासित करने से ठीक पहले जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे थे। समझा जाता है अनंत सिंह के मामले में काफी विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया। बाद में नीतीश ललन सिंह को उनके घर छोड़ने गए। इसी दौरान अनंत सिंह के निष्कासन का आदेश जारी कर दिया गया। हालांकि चुनाव के बाद नीतीश कुमार नीरज कुमार से मिलने उनके घर पहुंचे थे। इससे संदेश मिल गया था कि नीतीश कुमार इस बार भी नीरज कुमार के साथ खड़े हैं।

 अनंत सिंह के बगावती तेवर

मतदान से एक दिन पहले ही अनंत सिंह ने बयान दिया था कि वह चाहते है कि पार्टी उन पर कार्यवाही करे। अनंत सिंह ने बीच मतदान में ही फटाखे चलवा कर जनसुराज के अनुज सिंह की जीत का जश्न मनाया था। बताया जाता है कि जब जेडीयू का फरमान अनंत सिंह के पास पहुंचा तब उनके घर अनुज सिंह की जीत के लिए मिठाईयां बन रही थी।

 जबकि एमएलसी चुनाव के नतीजे 27 अक्टूबर को आएंगे। हालांकि उनके विश्वसनीय साथी छोटू सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।

मतदान के दौरान तीखी झड़प

मतदान के दौरान मोकामा प्रखंड कार्यालय अनंत सिह और नीरज कुमार के समर्थक आमने-सामने आ गए। झड़प की खबर मिलते ही पुलिस बल ने मौके पर पहुंच कर हालात पर काबू किया।

 दोनों तरफ से ललकार जारी

विधान परिषद के लिए मतदान के बाद अनंत सिह औऱ नीरज कुमार एक दूसरे को ललकारने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं।  अनंत सिंह ने निष्कासन के बाद कहा है कि बहुत तंग कर लिया अब इसका हिसाब होगा, किसी को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब बगावत और जुबान खोलने की वजह उन्हें मिल गई है।

वहीं नीरज कुमार भी ताल ठोंकने में पीछे नहीं हैं। हाल ही में नीरज कुमार के बीमार पड़ने पर अनंत सिंह ने उनकी फिरकी ली थी। अब निष्कासन के बाद नीरज कुमार ने उसका जवाब दिया है। नीरज कुमार ने कहा है कि अब उनकी तबियत खराब होने वाली है।

पार्टी की तबियत बिगड़ रही है

आरजेडी पूरे घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए हैं। हालांकि पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह ने इसे जेडीयू का अंदरूनी मामला बताया। साथ ही कहा कि आने वाले दिनों में जेडीयू में घमासान तेज़ होने की संभावना है।