India China Border Tension : भारत और चीन की सीमाओं पर तनाव को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आईटीबीपी (Indo-Tibetan Border Police) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जुलाई से चीनी सेना (PLA) के साथ आमने-सामने की स्थिति यानी फेस-ऑफ जारी है। राजस्थान के अलवर में अपने जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि असफिला जैसे क्षेत्रों में चीनी सैनिकों ने भारत की तय सीमा से महज छह से सात किलोमीटर के दायरे में अपने तंबू गाड़ रखे हैं। 31 अक्टूबर को रिटायर होने जा रहे डीजी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तरी सीमा पर तनाव बना है।

ड्रोन युद्ध और आधुनिक तकनीक पर जोर

महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान संघर्षों का हवाला देते हुए आधुनिक युद्ध की बदलती तस्वीर पेश की। उन्होंने बताया कि रूस जैसे बड़े देश को भी यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में हर महीने हजारों सैनिकों का नुकसान उठाना पड़ रहा, जबकि वह कुछ दिनों में जीत का दावा कर रहा था। इसी तरह ईरान ने बिना पारंपरिक नौसेना या वायु सेना के अमेरिकी महाशक्ति को कड़ी चुनौती दी है। इन मिसालों से यह साबित होता है कि आज के वक्त में ड्रोन सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। यही वजह है कि आईटीबीपी ने पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर अपनी हर बॉर्डर बटालियन में एक अलग ड्रोन प्लाटून खड़ी कर दी है। 95 हजार कर्मियों वाले इस बल को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा मिले 400 करोड़ रुपए के फंड का 70% हिस्सा ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने में लगाया जा रहा। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने 4000 करोड़ की आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिसमें से 1000 करोड़ रुपए विशेष रूप से ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए आरक्षित किए गए हैं। आईटीबीपी अब खुद अपने स्तर पर ड्रोन तैयार कर रहा, ताकि बाहरी सप्लायरों पर उसकी निर्भरता घट सके और इसके लिए ड्रोन पायलटों को भी युद्धस्तर पर ट्रेनिंग दी जा रही है।

गलवान से सबक और 'स्ट्राइक' कोर्स

साल 2020 में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने कांटेदार डंडों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से भारतीय जवानों पर कायराना हमला किया था, जिसमें हमारे 20 जवान शहीद हो गए थे। उस खूनी संघर्ष से कड़े सबक लेते हुए आईटीबीपी ने अब 'स्ट्राइक' नाम का एक विशेष कोर्स तैयार किया है। इसके तहत अब तक लगभग दस हजार जवानों को फिजिकल और मेंटल ट्रेनिंग दी जा चुकी है और 330 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। यह लक्ष्य रखा गया है कि साल 2027 के अंत तक बल का हर एक जवान इस कड़ी ट्रेनिंग से गुजरेगा। इसके अलावा, हर बॉर्डर बटालियन में 'शौर्य कमांडो' की टुकड़ी तैनात की जा रही है, जिन्होंने अरुणाचल में हालिया फेस-ऑफ के दौरान अपनी बेहतरीन क्षमता का परिचय दिया है।

जवानों के लिए नई सुविधाएं और वाहन

कठिन पहाड़ी इलाकों और कड़ाके की ठंड से निपटने के लिए बल के पुराने हथियारों और साजो-सामान को तेजी से बदला जा रहा है। पचास साल पुराने हथियारों की जगह अब अत्याधुनिक ऑल-ट्रेन वाहन, ग्राउंड व्हीकल और क्विक रिएक्शन वाहन शामिल किए जा रहे हैं। वाहनों को बर्फीले मौसम में तुरंत चालू करने के लिए कोसोवो मिशन के तर्ज पर 'कोल्ड स्टार्ट किट' दी गई है। युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए अब भूमिगत बंकरों का निर्माण किया जा रहा है, ताकि दुश्मन के हवाई हमलों से बचा जा सके। जवानों की सेहत और सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। सब-जीरो तापमान वाले इलाकों में मौजूद 383 बैरकों में से 342 को इंसुलेटेड कर दिया गया है। दूर-दराज की चौकियों पर बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए 141 जनरेटर सेट और सोलर वॉटर हीटर लगाए गए हैं। साथ ही जवानों की डाइट में चीनी और तेल की मात्रा घटाई गई है। डीजी ने चिंता जताते हुए यह भी चेताया कि साल 2020 के बाद से जवानों में अल्कोहल डिपेंडेंस सिंड्रोम के मामले बढ़े हैं और उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए हनी ट्रैप से बचने की सख्त हिदायत दी है।

राजनीतिक घमासान और कांग्रेस के तीखे सवाल

आईटीबीपी के इन बयानों और खुलासों के बाद देश की सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एक तरफ आईटीबीपी महानिदेशक अरुणाचल में चीन के साथ फेस-ऑफ की बात खुले तौर पर स्वीकार कर रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री और सरकार की इस पर चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ताकसिंग में फेस-ऑफ के बाद वाचा-दमाई में बातचीत तो हुई, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार हमारे गश्त बिंदु फिर भी खो गए हैं। इसके अलावा चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के नाम बदल रहा है और ब्रह्मपुत्र नदी पर 60 हजार मेगावाट का विशाल बांध बना रहा है, जो भारत की जल और पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे देश के छोटे उद्योग यानी एमएसएमई बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं और मेक इन इंडिया का नारा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।