CISF News : भारत के सबसे अहम और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा अभेद्य बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद यह नया और आधुनिक प्रशासनिक तथा ऑपरेशनल ढांचा 1 नवंबर से पूरे देश में पूरी तरह से लागू होगा। इसका उद्देश्य CISF की कमान तथा निगरानी प्रणाली को अलग-अलग सेक्टरों-बिजली, कोयला, स्टील, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बंदरगाह, सरकारी इमारतें, म्यूजियम, स्मारक और मेट्रो-की खास सुरक्षा जरूरतों के अनुसार ढालना है। इस व्यवस्था के आने से सुरक्षा तंत्र में विशेष विशेषज्ञता आएगी, ऑपरेशनल निगरानी और ज्यादा बेहतर होगी, सुरक्षा के नियमों व तरीकों में एकरूपता आएगी और संबंधित मंत्रालयों, विभागों तथा प्रतिष्ठानों के प्रबंधन के साथ तालमेल बहुत मजबूत हो जाएगा।

क्षेत्रीय कमान से कार्यात्मक विशेषज्ञता की ओर

अब तक सीआईएसएफ देश भर के एयरपोर्ट्स, बंदरगाहों, परमाणु व अंतरिक्ष केंद्रों, पावर प्लांट्स, स्टील प्लांट्स, कोयला खदानों, ऑयल रिफाइनरियों, करेंसी प्रेस, सरकारी इमारतों, ऐतिहासिक स्मारकों और मेट्रो जैसी अलग-अलग जगहों की सुरक्षा संभालता है। इन सभी जगहों का काम करने का तरीका, बुनियादी ढांचा, संभावित खतरे और सुरक्षा की चुनौतियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती हैं।

पहले इलाके के आधार पर तय होती थी जिम्मेदारी

पहले सुरक्षा की यह पूरी जिम्मेदारी आमतौर पर क्षेत्र यानी इलाके के आधार पर तय की जाती थी। वैसे, पिछले 25 साल में सीआईएसएफ ने एविएशन (एयरपोर्ट), परमाणु ऊर्जा (DAE) और अंतरिक्ष विभाग (DOS) जैसे कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में काम यानी फंक्शन के आधार पर सुरक्षा मॉडल लागू किया था। इन क्षेत्रों से मिले शानदार अनुभवों ने यह साबित कर दिया कि जब एक ही तरह के काम वाले सभी प्रतिष्ठानों की निगरानी एक ही कमान के तहत होती है तो वहां तैनात जवानों की ट्रेनिंग और बेहतर होती है, सुरक्षा के नियम (SOP) ज्यादा सटीक बनते और प्रबंधन के साथ आपसी तालमेल बेहतरीन रहता है। इस सफलता से सीख लेते हुए और चर्चा के बाद गृह मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद अब बचे क्षेत्रीय सेक्टरों को भी पूरी तरह से कार्यात्मक आधार पर बदल दिया गया है।

क्या हैं नए बदलाव और कौन-से नए सेक्टर बने?

इस नई व्यवस्था के तहत पुराने क्षेत्रीय सेक्टरों को नए रूप में इस तरह पुनर्गठित किया गया है:-

सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक और एमआरटीएस सेक्टर : पुराने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) सेक्टर को पूरी तरह बदलकर अब यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में होगा।

पावर सेक्टर-1 और 2 : पुराने नॉर्थ सेक्टर (नई दिल्ली) को अब पावर-I सेक्टर बनाया गया है, जबकि नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-II (कोलकाता) को पावर-II सेक्टर का नया रूप दिया गया है।

कोयला और स्टील सेक्टर : रांची के ईस्टर्न सेक्टर को अब डेडिकेटेड कोयला सेक्टर में बदला गया है। अब भिलाई का सेंट्रल सेक्टर स्टील सेक्टर के रूप में काम करेगा।

पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस सेक्टर : गुवाहाटी के पुराने नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर को बदलकर अब पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर बनाया गया है।

बंदरगाह (पोर्ट) सेक्टर : देश के समुद्री व्यापार और तटों की सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए मुंबई के वेस्टर्न सेक्टर को वेस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर (पश्चिमी तट) और चेन्नई के साउथ सेक्टर को ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर (पूर्वी तट) में तब्दील कर दिया गया है। मौजूदा डीएई और डीओएस सेक्टर (बेंगलुरु), एयरपोर्ट सेक्टर-1 (नई दिल्ली) और एयरपोर्ट सेक्टर-2 (बेंगलुरु) पहले की तरह ही अपने मौजूदा फंक्शनल ढांचे के तहत काम करते रहेंगे।

बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच यह सुधार क्यों बेहद जरूरी?

यह पूरा पुनर्गठन ऐसे वक्त में हो रहा है जब सीआईएसएफ की भूमिका सिर्फ पारंपरिक औद्योगिक सुरक्षा तक सीमित न रहकर लगातार फैल रही और उसे कई नई तथा विशेष जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं:-

सीआईएसएफ को अंतर्राष्ट्रीय जहाज और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा (आईएसपीएस) कोड के तहत बंदरगाहों के लिए एक मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (RSO) के तौर पर नामित किया गया है। बंदरगाह क्षेत्र में यह नया ढांचा विशेष विशेषज्ञता विकसित करने में बहुत मददगार साबित होगा। इस बल को जम्मू-कश्मीर में मौजूद अति-संवेदनशील जेलों की सुरक्षा का जिम्मा भी सौंपा गया है। इसके अलावा सीआईएसएफ को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हवाई सुरक्षा की नोडल एजेंसी भी बनाया गया है। इन बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए विशेष ट्रेनिंग, साफ जवाबदेही और उभरते खतरों से निपटने के लिए एक मिले-जुले व समन्वित दृष्टिकोण की जरूरत है।

साइबर सुरक्षा मजबूत की जा रही

आज के समय में सुरक्षा में तकनीक के बढ़ते अहम रोल को देखते हुए सीआईएसएफ देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर अपनी साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को भी लगातार मजबूत कर रहा, ताकि देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को किसी भी संभावित साइबर हमले या संदिग्ध ड्रोन के खतरों से सुरक्षित रखा जा सके। इस बड़े पुनर्गठन का देश के लिए सीधा और मतलब है कि अब भारत की तमाम रणनीतिक और आर्थिक संपत्तियों की सुरक्षा एक बेहद दक्ष, आधुनिक और सेक्टर-विशेष सुरक्षा तंत्र के मजबूत हाथों में होगी। पूरी तरह से फंक्शनल कमान में तब्दील होने के बाद सीआईएसएफ एक ऐसा फ्यूचर-रेडी बल बन जाएगा, जो भविष्य के हर खतरे का डटकर और सक्रिय रूप से सामना कर सकेगा तथा भारत की तेज आर्थिक तरक्की की नींव को सुरक्षित रखने में अपनी अहम भूमिका निभाएगा।