Ashutosh Ranka And Saurav Das News : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की पुलिस हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट से तीखी टिप्पणियां और फटकार मिलने के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। आज सुनवाई के दौरान जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने दोनों नेताओं के बर्ताव पर सवाल खड़े किए और पूछा कि जब आप पर पाबंदी थी तो आप जंतर-मंतर क्यों पहुंचे? आखिर आपके संगठन का मुख्य मकसद क्या है? CJP के वकील ने जब कोर्ट को बताया कि सौरव दास की उम्र 27 साल और आशुतोष की उम्र 31 साल है तो जज ने कहा कि ये कोई जेन-जी नहीं हैं, जिन्हें नासमझी हो।

'सरकार बदलने का रास्ता सिर्फ चुनाव'

अदालत ने कहा कि हर नागरिक को प्रदर्शन करने का हक जरूर है, लेकिन जब बात देश की शांति और कानून व्यवस्था की आती है तो अदालत के लिए उसे देखना भी उतना ही जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि किसी प्रदर्शन का मकसद सीधे तौर पर सत्ता पलटना है तो हमारे लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता सिर्फ चुनाव के जरिए होता है, ऐसी हरकतों से नहीं।

दूसरे देशों की हिंसा का उदाहरण

सुनवाई के दौरान जज ने अन्य देशों में हुए हिंसक प्रदर्शनों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा, जब आप जैसे नेता आगे रहकर प्रदर्शन का नेतृत्व करते हैं और बैरिकेड तोड़ देते हैं तो भीड़ भी आपको देख वही करती है। ऐसे में कई बार स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है। दूसरे देशों में भी ऐसा दिखा है कि कैसे छात्रों का सामान्य प्रदर्शन देखते ही देखते आगजनी, तोड़फोड़ और इमारतों को जलाने जैसी घटनाओं में बदल जाता है। कोर्ट ने सीधा सवाल किया कि पहली गिरफ्तारी के समय जो बॉन्ड भरा था, उसका उल्लंघन क्यों किया गया?

क्या है पूरा मामला और क्यों हुई थी गिरफ्तारी?

CJP के नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर उस वक्त हिरासत में लिया गया था, जब वे प्रदर्शन की अगुवाई करने आ रहे थे। हालांकि, उसी दिन 50 हजार रुपये का मुचलका (बॉन्ड) भरकर उन्हें छोड़ दिया गया था। इसके बाद भी जब ये नेता जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए अड़े रहे तो 14 अक्टूबर को इन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया और पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मजिस्ट्रेट का आदेश और हाईकोर्ट की दौड़ 

स्पेशल एक्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने 19 अक्टूबर को आदेश में कहा कि इन दोनों नेताओं ने जानबूझकर जमानत बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है और शहर की शांति भंग की। इस चलते इनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई। मजिस्ट्रेट के इस फैसले के विरुद्ध दोनों नेता दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे, जहां से आज उन्हें याचिका वापस लेनी पड़ी। अब दोपहर के वक्त SEM कोर्ट में मामले पर आगे की सुनवाई होगी।