Protest Against SIR : राजधानी दिल्ली में आज एसआईआर (SIR) के खिलाफ जबरदस्त उबाल दिख रहा है। बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास सैकड़ों लोग प्रदर्शन कर रहे। उनके हाथों में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की तस्वीरें और पोस्टर हैं। उन पर उनके इस्तीफे की मांग लिखी हुई है। इस बड़े विरोध-प्रदर्शन का आयोजन पीपल अगेंस्ट एसआईआर और छात्र संगठन आईसा (AISA) ने मिलकर किया है। इन प्रदर्शनकारियों को बंगला साहिब से चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकालना है। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात कर रखा है।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री भी हुए थे शामिल
इस प्रदर्शन में जाने-माने अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, लोकप्रिय अभिनेता प्रकाश राज और देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के भी शामिल होने की पूरी संभावना है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए दिल्ली पुलिस ने पहले ही ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी है, जिसमें कहा गया है कि बंगला साहिब और जंतर-मंतर के आसपास भारी भीड़ जुटने के कारण शहर के कई रास्तों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग सकता है। बता दें, पीपल अगेंस्ट एसआईआर मंच का गठन महज पिछले हफ्ते ही किया गया है। एसआईआर के विरोध की आवाज को एक मंच पर लाने के लिए बनाए गए इस संगठन में देश के आम नागरिकों के अलावा किसान यूनियनें, मजदूर संगठन, महिला और युवा संगठन जुड़ते जा रहे हैं।
क्राइम ब्रांच के रडार पर कॉकरोच पार्टी के नेता
दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कॉकरोच पार्टी के दो प्रमुख नेताओं-सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए फिर से नया नोटिस भेजने की तैयारी में है। इससे पहले पुलिस ने इन दोनों नेताओं को गुरुवार को थाने तलब किया था, लेकिन वे जांच में शामिल होने नहीं पहुंचे और पुलिस से पेश होने के लिए कुछ और समय की मांग की। इन दोनों नेताओं को बुधवार को ही दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत से बड़ी राहत मिली थी। इन्हें 50-50 हजार के मुचलके पर जमानत मिली थी। दरअसल, पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में दोनों को गिरफ्तार किया था।
जंतर-मंतर से जुड़ा विवाद और कानूनी पेंच
सरकार की ओर से 12 अक्टूबर को ही जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका हाथों में तिरंगा झंडा थामे वहां पहुंच गए थे। बिना अनुमति के वहां जाने और शांति भंग करने के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर 5 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। इसके बाद 19 अक्टूबर को कोर्ट ने उनकी हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ा दी थी। हालांकि, बुधवार को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सीधे दखल देने से साफ इनकार कर दिया था और कहा था कि नेताओं को पहले मजिस्ट्रेट अदालत का फैसला आने देना चाहिए। आवश्यकता होने पर वे बाद में ऊपरी अदालत जा सकते हैं।
जंतर-मंतर वाला केस अब क्राइम ब्रांच के हाथों में
दिल्ली पुलिस ने बुधवार को जंतर-मंतर पर बिना इजाजत जाने से जुड़े इस पूरे मामले की जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी। 13 अक्टूबर को जब ये दोनों नेता कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर गए थे तो उस वक्त इनके खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें से कनॉट प्लेस से जुड़ा मामला 20 अक्टूबर को ही क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया था और अब जंतर-मंतर वाले केस की कमान भी क्राइम ब्रांच के हाथों में आ गई है।
आईसा अध्यक्ष की याचिका पर भी फैसला आज
इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट आज छात्र संगठन आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर भी अपना अहम फैसला सुनाने वाला है। नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को अदालत में चुनौती दी है, जिसमें पुलिस ने उन्हें जांच के दौरान पूरी तरह शांति बनाए रखने के एवज में 10,000 रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार पेश करने का कड़ा निर्देश दिया था।