दिवाली के त्योहार पर पटाखों और दीयों से होने वाले हादसों को देखते हुए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने अपनी आपातकालीन सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा है। त्योहारों की खुशियों में कोई खलल न पड़े और हर इमरजेंसी से सख्ती से निपटा जा सके, इसके लिए अस्पतालों ने खास इंतजाम किए हैं। पर्व के दौरान पटाखों से जलने, आंखों या चेहरे पर चोट लगने और सड़क हादसों के मामलों के मद्देनजर मेडिकल टीमों को पूरी तरह अलर्ट रखा गया है। डॉक्टरों ने लोगों से सावधानी बरतने और किसी भी हादसे की स्थिति में तुरंत सही प्राथमिक उपचार करने की अपील की है। एम्स के प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव एवं बर्न्स सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. मनीष सिंघल ने लोगों को सुरक्षित तरीके से दिवाली मनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही त्योहार की खुशियों को गंभीर हादसे में बदल सकती है। पटाखों के इस्तेमाल से हाथों और आंखों में चोट की आशंका बनी रहती है, जबकि दीपकों एवं मोमबत्तियों से आग लगने या झुलसने की दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
AIIMS में इमरजेंसी से लेकर ट्रॉमा सेंटर तक तैयारी
एम्स की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. निरुपम मदान के मुताबिक, दिवाली को देखते हुए अस्पताल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी इमरजेंसी, ट्रॉमा सेंटर, मुख्य अस्पताल की इमरजेंसी और आरपी सेंटर की आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखा गया है। सभी विभागों में डॉक्टरों की ड्यूटी का रोस्टर तय कर दिया गया है। ऑन-कॉल फैकल्टी को भी दिल्ली में उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर वे तत्काल अस्पताल पहुंच सकें। इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाले क्रैश कार्ट और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की दोबारा जांच की गई है। अस्पताल प्रशासन को उम्मीद है कि इन व्यवस्थाओं से पटाखों से झुलसने, आंखों में चोट लगने और सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।
पटाखे जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
डॉक्टरों ने साफ कहा है कि पटाखे जलाते वक्त जरा संभलकर रहें और पूरी सावधानी बरतें। बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे नहीं जलाने देना चाहिए। उन्हें बड़ों की निगरानी में ही आतिशबाजी करनी चाहिए। पटाखों को हाथ में पकड़कर जलाने से बचें और हमेशा खुले स्थान का इस्तेमाल करें। पास में पानी से भरी बाल्टी रखना भी जरूरी है। इसके अलावा पोटाश पटाखा गन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे गंभीर चोट लग सकती है। पटाखे जलाते समय सिंथेटिक कपड़ों के बजाय सूती कपड़े पहनें और ढीले कपड़ों से बचें। दीये और मोमबत्तियां जलाते समय भी सतर्क रहना जरूरी है। इन्हें दरवाजों, सीढ़ियों या आने-जाने के रास्तों पर न रखें। पर्दों, सोफे, कागज और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से इन्हें दूर रखें।
जलने पर 15-20 मिनट तक बहते पानी से करें उपचार
डॉक्टरों की सलाह है कि जलने पर तुरंत उस जगह को 15-20 मिनट तक नल के ठंडे पानी के नीचे रखना चाहिए, इससे बहुत राहत मिलती है।जले हुए स्थान पर घी, तेल, टूथपेस्ट या किसी अन्य घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके बाद प्रभावित हिस्से को साफ कपड़े से ढक दें। अगर जलने की चोट गंभीर है या चेहरा और आंखें प्रभावित हुई हैं, तो बिना देरी किए अस्पताल पहुंचें। पटाखे से आंख में चोट लगने पर आंख को रगड़ने से बचें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह
डॉ. मनीष सिंघल ने डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को दिवाली के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसके साथ ही लोगों से शराब पीकर वाहन नहीं चलाने की अपील की गई है, क्योंकि त्योहार के दौरान नशे में ड्राइविंग से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी सतर्कता से पटाखों और आग से होने वाली कई गंभीर दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इसलिए सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं और किसी भी आपात स्थिति में घरेलू उपायों के बजाय समय पर चिकित्सकीय सहायता लें।