Justice Sanjay Karol Statement On UCC : यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर देश में फिर चर्चा गरम हो गई है। इस बार यह बहस सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय करोल के बयान के बाद शुरू हुई है। उन्होंने UCC को अभी की सबसे बड़ी जरूरत बताई। उनका कहना है कि कोई संविधान के अनुच्छेद-44 की असली भावना तथा धर्मनिरपेक्षता को जानना चाहता है तो उसे बिहार की छठ पूजा देखनी चाहिए। बीते कल यानी 28 अक्टूबर को दिल्ली में भारत कलेक्टिव फाउंडेशन की ओर से अनुच्छेद-44 पर कानून चर्चा (नेशनल लीगल डायलॉग) थी। इस दौरान हिमाचल प्रदेश के निवासी जस्टिस करोल ने UCC का समर्थन कर छठ पूजा की मिसाल देते हुए UCC की आवश्यकता समझाई।
'धर्मनिरपेक्षता का सबसे सुंदर उदाहरण छठ'
पूर्व जज जस्टिस संजय करोल ने कहा कि उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान देश के आदिवासी और गैर-आदिवासी, दोनों क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिला है। इस वजह से वे जमीनी हकीकत से अवगत हैं। सुप्रीम कोर्ट भी देश की असली स्थिति अवगत है। उन्होंने पटना हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रहते हुए अपने अनुभवों को साझा कर बताया कि छठ धर्मनिरपेक्षता का बेहतरीन उदाहरण है।
कौन हैं जस्टिस संजय करोल?
पटना हाईकोर्ट में कार्यकाल : वे 10 नवंबर 2019 से लेकर 3 साल से अधिक समय तक पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे।
अन्य महत्वपूर्ण पद : बिहार में अपनी सेवा के दौरान वे बिहार राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक (पैटर्न-इन-चीफ) और चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति (चांसलर) भी रहे।
न्यायिक सफर : पटना आने से पहले उन्होंने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जज, वहां के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और त्रिपुरा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
सुप्रीम कोर्ट की कार्य अवधि : 6 फरवरी 2023 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था। यहां से वे 22 अगस्त 2026 को रिटायर हो गए।
क्या है संविधान का अनुच्छेद 44?
भारतीय संविधान के भाग-4 में दिए गए राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) अंतर्गत अनुच्छेद-44 को रखा गया है। इसमें यह बताया गया है कि सरकार का यह प्रयास होगा कि पूरे देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जा सके।
बिहार में छठ पर्व का सामाजिक महत्व
छठ के दौरान घाटों पर सभी भेदभाव मिट जाते हैं। सभी वर्गों के लोग साथ में एक नदी या तालाब में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते और अगली सुबह उदीयमान सूर्य की पूजा-अर्चना करते हैं। जस्टिस करोल के मुताबिक यही समानता एवं सौहार्द UCC और अनुच्छेद-44 का मूल आधार है।