रावलपिंडी में खेले गए वनडे मुकाबले में श्रीलंका ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने 202 रन की रिकॉर्डतोड़ पारी खेलकर अपनी टीम को 429 रन तक पहुंचाया, लेकिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने इस विशाल लक्ष्य को भी छोटा साबित कर दिया। श्रीलंका ने 49.5 ओवर में आठ विकेट खोकर 430 रन बनाए और दो विकेट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 

ब्रूक ने 114 गेंदों में जड़ा सबसे तेज दोहरा शतक

इंग्लैंड की पारी में हैरी ब्रूक ने गेंदबाजों की जमकर खबर ली। उन्होंने 116 गेंदों पर 202 रन बनाए, जिसमें 21 चौके और 10 छक्के शामिल थे। ब्रूक ने महज 114 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा किया और वनडे क्रिकेट में सबसे तेज डबल सेंचुरी लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उन्होंने भारत के शुभमन गिल को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 117 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी। ब्रूक इंग्लैंड की ओर से वनडे में दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने। उनकी इस पारी ने बेन स्टोक्स के 182 रन के पिछले इंग्लिश रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। हालांकि, टीम की हार के कारण उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि जीत में नहीं बदल सकी। 

रूट और विल जैक्स ने भी जमाए रन

ब्रूक को दूसरे छोर से जो रूट का अच्छा साथ मिला। रूट ने 69 रन बनाए और इसी दौरान वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 8,000 रन पूरे करने वाले इंग्लैंड के पहले बल्लेबाज बने। विल जैक्स ने भी आक्रामक अंदाज दिखाते हुए 30 गेंदों पर नाबाद 66 रन ठोक दिए। इंग्लैंड ने आखिरी 10 ओवर में 156 रन बटोरे और स्कोर को 429/4 तक पहुंचा दिया। टॉम बैंटन ने भी 50 रन का योगदान दिया। इतने बड़े स्कोर के बाद इंग्लैंड को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन गेंदबाज इस बढ़त का बचाव नहीं कर सके। 

शुरुआती झटकों के बाद श्रीलंका की शानदार वापसी

430 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने महज 24 रन पर दो विकेट गंवा दिए। कप्तान कुसल मेंडिस बिना कोई गेंद खेले रन आउट हो गए, जबकि कामिंदु मेंडिस को जोश टंग ने पवेलियन भेजा। इसके बाद पवन रत्नायके और अविष्का फर्नांडो ने पारी को संभाला। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 166 रन की साझेदारी हुई। फर्नांडो 83 गेंदों पर 97 रन बनाकर आउट हुए, जबकि रत्नायके ने 106 गेंदों पर 130 रन की शानदार पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी ने श्रीलंका को मुकाबले में बनाए रखा। 

दासुन शनाका के 97 रन ने बदला मैच का रुख

रत्नायके के आउट होने के बाद दासुन शनाका ने तेजी से रन बनाकर इंग्लैंड पर दबाव बढ़ा दिया। उन्होंने केवल 50 गेंदों में 97 रन बनाए और अपनी पारी के दौरान आठ छक्के जड़े। वह शतक से सिर्फ तीन रन दूर रह गए, लेकिन उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने श्रीलंका की जीत की उम्मीदों को मजबूत कर दिया। शनाका और रत्नायके के बीच भी अहम साझेदारी हुई, जिसने रन चेज को सही दिशा दी। मध्य ओवरों में श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने इंग्लैंड के गेंदबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और लगातार बाउंड्री बटोरते रहे। 

आखिरी ओवर में लियानागे ने छक्के से दिलाई जीत

मुकाबले का रोमांच अंतिम ओवर में चरम पर पहुंच गया। श्रीलंका को जीत के लिए आखिरी छह गेंदों में आठ रन चाहिए थे। जोश टंग ने लगातार दो विकेट लेकर इंग्लैंड की उम्मीदें जगा दीं, लेकिन जनिथ लियानागे ने दबाव में धैर्य बनाए रखा। लियानागे ने 27 गेंदों पर नाबाद 61 रन बनाए। उन्होंने अंतिम ओवर की पांचवीं गेंद पर छक्का जड़कर श्रीलंका को जीत दिला दी। श्रीलंका ने एक गेंद शेष रहते 430 रन पूरे कर लिए और वनडे इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज अपने नाम किया। इस प्रारूप में इससे बड़ा सफल लक्ष्य केवल दक्षिण अफ्रीका ने 2006 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 438 रन बनाकर हासिल किया था। 

श्रीलंका के नाम कई बड़े रिकॉर्ड

इस जीत के साथ श्रीलंका ने वनडे क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रन चेज दर्ज किया। इससे पहले टीम का सर्वश्रेष्ठ सफल पीछा 2017 में भारत के खिलाफ 322 रन का था। इंग्लैंड के विरुद्ध भी एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह अब तक का सबसे बड़ा सफल रन पीछा रहा। रावलपिंडी के मैदान पर दोनों टीमों ने मिलकर कुल 859 रन बनाए, जो एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास में दूसरा सबसे विशाल योग है। एक ओर ब्रूक की रिकॉर्डतोड़ पारी चर्चा में रही, तो दूसरी ओर श्रीलंका ने असाधारण बल्लेबाजी के दम पर मुकाबला अपने नाम कर लिया। हैरी ब्रूक ने मैच के बाद माना कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड का महत्व तब कम हो जाता है, जब टीम जीत हासिल नहीं कर पाती। इंग्लैंड के लिए अब गेंदबाजी में सुधार करना बड़ी चुनौती होगी, जबकि श्रीलंका की इस जीत ने त्रिकोणीय वनडे सीरीज को और रोमांचक बना दिया है।