हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल करीब 45 घंटे बाद समाप्त हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के बाद शुक्रवार शाम 23 अक्टूबर को हड़ताल वापस लेने का फैसला किया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने काम पर लौटना शुरू कर दिया और बिजली आपूर्ति बहाल करने की प्रक्रिया तेज हुई। कई इलाकों में बिजली और पानी की समस्या से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
निजी कंपनी को लाइसेंस देने के विरोध में हुई हड़ताल
बिजली कर्मचारियों का विरोध गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के फैसले के खिलाफ था। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने कंपनी को 25 साल के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिया था। कर्मचारियों और इंजीनियरों को आशंका थी कि इस फैसले से बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता खुलेगा।
सरकार के आश्वासन के बाद बनी सहमति
पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, बिजली मंत्री अनिल विज और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई। सरकार ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत नियामक आयोग को लाइसेंस संबंधी फैसले की समीक्षा करने और उसे रद्द करने के लिए निर्देश देने का आश्वासन दिया। साथ ही, धारा 94 के तहत समीक्षा याचिका दाखिल करने की बात भी कही गई। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा की। कर्मचारियों की अन्य मांगों पर चर्चा के लिए 3 नवंबर को फिर बैठक प्रस्तावित है। निजी कंपनी के लाइसेंस पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।
उद्योगों को 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने से हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ। औद्योगिक संगठनों के मुताबिक, करीब 24 हजार फैक्ट्रियों में कामकाज बंद रहने से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, बावल, पलवल और नूंह सहित कई औद्योगिक इलाकों में इकाइयों को परेशानी का सामना करना पड़ा। त्योहारी सीजन में उत्पादन रुकने से कंपनियों के ऑर्डर और माल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। कई इकाइयों के सामने तय समय पर सामान पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई। नुकसान का यह आंकड़ा औद्योगिक संगठनों का अनुमान है।
बिजली संकट से पानी और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित
हड़ताल का असर केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहा। कई शहरों और गांवों में बिजली कटौती के कारण पेयजल आपूर्ति बाधित हुई। बूस्टिंग स्टेशन और ट्यूबवेल बंद रहने से लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ा। कुछ जगहों पर लोगों ने जनरेटर की मदद से पानी की टंकियां भरीं।अस्पतालों में भी बिजली की समस्या के कारण जनरेटर पर निर्भरता बढ़ी। कुछ स्थानों पर जांच सेवाएं और अन्य सुविधाएं प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। कई इलाकों में लोगों ने बिजली बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन किए और सड़कें जाम कीं।
अब बिजली व्यवस्था बहाल करने पर जोर
हड़ताल समाप्त होने के बाद कर्मचारियों के काम पर लौटने से बिजली व्यवस्था सामान्य करने की कोशिश शुरू हो गई है। जहां बिजली आपूर्ति बाधित रही या तकनीकी खराबियां आईं, वहां पूरी तरह स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच अगली बैठक में बाकी मांगों पर चर्चा होगी, जबकि निजी कंपनी के लाइसेंस को लेकर आगे की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।