संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के आपराधिक संगठन D-कंपनी को 'भारत आधारित' बताए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने रिपोर्ट को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि "ऐसी चूक से अंतरराष्ट्रीय संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है।" यह विवाद आतंकवाद से मुकाबला करते हुए मानवाधिकारों की रक्षा से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट को लेकर सामने आया है। रिपोर्ट में D-कंपनी के प्रमुख दाऊद इब्राहिम का उल्लेख अल-कायदा से संबंध रखने वाले आपराधिक गिरोह के सरगना के तौर पर किया गया है।
भारत ने रिपोर्ट की भाषा पर जताई आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि "विशेष प्रतिवेदकों की रिपोर्टों में तथ्यात्मक गलतियां होना और इसके लिए किसी की जवाबदेही तय न किया जाना बेहद गंभीर चिंता का विषय है।" उनके मुताबिक, रिपोर्ट में D-कंपनी को 'भारत आधारित' बताने से वास्तविक स्थिति की अधूरी तस्वीर सामने आती है। पुरी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि "दाऊद इब्राहिम और उसके संगठन को लेकर उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट है कि वह भारत में आतंकवादी हमलों के मामलों में वांछित है। रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण तथ्य का पर्याप्त उल्लेख नहीं किया गया।"
'दाऊद 2003 से पहले ही भारत छोड़ चुका था'
रघु पुरी ने कहा कि "दाऊद इब्राहिम 2003 में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले भारत छोड़ चुका था। उनके अनुसार, देश से बाहर रहने के दौरान उसे अल-कायदा और उसके तत्कालीन प्रमुख ओसामा बिन लादेन से संबंधों के आधार पर सूचीबद्ध किया गया था।" भारतीय राजनयिक ने जोर देकर कहा कि "दाऊद इब्राहिम अब भी भारत में वांछित अपराधी है।" उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सूची में दर्ज जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि "दाऊद उसी देश में रह रहा है, जहां ओसामा बिन लादेन का पता चला था और अमेरिकी अभियान में उसे मार गिराया गया था।" यह पाकिस्तान की ओर स्पष्ट संकेत था। बता दें कि ओसामा बिन लादेन 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान मारा गया था।
आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और निष्पक्ष रुख जरूरी
भारत ने दोटूक शब्दों में कहा है कि मानवाधिकारों की आड़ लेकर आतंकवाद या कट्टरपंथ को सही ठहराने की कोशिश कतई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि रघु पुरी ने जोर देकर कहा कि "आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए और इसके खिलाफ पूरी निष्पक्षता व स्पष्टता से रुख अपनाने की जरूरत है।" उन्होंने पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की ओर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर की गई टिप्पणियों को भी खारिज किया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर एक बार फिर साफ किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अटूट व अभिन्न हिस्सा थे, हैं और रहेंगे। यूएन की रिपोर्ट पर भारत की सख्त आपत्ति का सबसे बड़ा कारण यह है कि इसमें कुख्यात आतंकी दाऊद इब्राहिम और उसकी 'डी-कंपनी' से जुड़ी अहम जानकारियों को सिरे से खारिज और नजरअंदाज कर दिया गया। नई दिल्ली ने साफ़ किया है कि ऐसी रिपोर्ट तैयार करने वाले विशेषज्ञों को तथ्यात्मक सटीकता, निष्पक्षता और जवाबदेही हर हाल में सुनिश्चित करनी चाहिए।