कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र में 1991 में हुई कथित पुलिस मुठभेड़ के मामले में करीब 35 साल बाद बड़ी कार्रवाई हुई है। CBCID की जांच में उस पुलिसिया थ्योरी पर सवाल उठे हैं, जिसमें राकेश पाठक समेत 12 लोगों को बदमाश बताकर अवैध हथियार व विस्फोटक के साथ गिरफ्तारी का दावा किया गया था। इस मामले में अब 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
मुफ्त प्लॉट न मिलने पर रची गई थी मुठभेड़ की कहानी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ एक कथित जमीन का टुकड़ा थी। आरोप है कि महाराजपुर थाने के तत्कालीन प्रभारी विद्यासागर त्रिपाठी, राकेश पाठक के परिवार से एक प्लॉट मुफ्त में (हथियाना) चाहते थे। परिवार के इनकार के बाद पुलिस ने राकेश और उसके साथियों को फर्जी मुठभेड़ में फंसाने की साजिश रची। हालांकि, यह आरोप जांच में सामने आए तथ्यों और शिकायतों पर आधारित है। मामले में दर्ज प्राथमिकी के बाद आरोपित पुलिसकर्मियों की भूमिका का कानूनी परीक्षण होना बाकी है।
मुठभेड़ और हथियारों से जुड़े मुकदमे किए दर्ज
तत्कालीन पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 22 अगस्त 1991 को पुलिस को यह सूचना मिली थी कि कुछ बदमाश नर्वल मोड़ के पास जीटी रोड पर वाहनों को रोककर लूटपाट की साजिश रच रहे हैं। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो कथित तौर पर बदमाशों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद मुठभेड़ में राकेश पाठक और उसके 11 साथियों को गिरफ्तार करने का दावा किया गया। तत्कालीन पुलिस ने आरोपियों के पास से अवैध हथियार और विस्फोटक बरामद होने का दावा किया था। इसी आधार पर उनके खिलाफ लूट की साजिश, मुठभेड़ और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज कर सभी को जेल भेज दिया गया था। लेकिन बाद में इस घटनाक्रम को चुनौती दी गई और पूरे मामले की जांच की मांग उठी।
डीसीएम चालक और क्लीनर के बयान जांच में अहम कड़ी बने
राकेश पाठक के बड़े भाई देव प्रसाद पाठक द्वारा शासन में शिकायत दर्ज कराने के बाद, इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए मामले की जांच सीबीसीआईडी (CBCID) को सौंपी गई। जांच के दौरान डीसीएम (DCM) चालक उमाशंकर पासी और क्लीनर बृजेन्द्र सिंह के बयान सबसे अहम कड़ी साबित हुए। दोनों ने पुलिस की मुठभेड़ वाली थ्योरी को पूरी तरह नकार दिया। उनके अनुसार, वे कानपुर से बनारस साबुन लेकर जा रहे थे, तभी रास्ते में पुलिसकर्मियों ने गाड़ी रोककर खुद सवारी की और कुछ अन्य लोगों को भी वाहन में चढ़ा लिया। जांच के बयानों से साफ हुआ कि बाद में घटनास्थल पर फर्जी मुठभेड़ की स्क्रिप्ट रची गई थी। चालक-क्लीनर के बयान, मौखिक साक्ष्य और दस्तावेजी सबूतों की गहन पड़ताल के बाद पुलिस का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
फर्जी मुठभेड़ के सभी 12 निर्दोष
- राकेश पाठक पुत्र सतीश पाठक — मकान नंबर 104, गांधीग्राम, थाना चकेरी, जनपद कानपुर नगर।
- जगदीश द्विवेदी पुत्र रामेश्वर द्विवेदी — मकान नंबर 104, गांधीग्राम, थाना चकेरी, जनपद कानपुर नगर।
- राम सिंह उर्फ टेशू पुत्र हाकिम सिंह — जामू, थाना बिधनू, जनपद कानपुर नगर।
- कल्लू उर्फ सुरेंद्र कुमार द्विवेदी पुत्र राम नारायण द्विवेदी — मकान नंबर 341, सफीपुर, थाना चकेरी, जनपद कानपुर नगर।
- पप्पू सिंह पुत्र रामहेत — कुडवाना, बहादुर नगर, थाना बिधनू, जनपद कानपुर नगर।
- शिवकुमार पुत्र देवी लाल — मकान नंबर 104, गांधीग्राम, थाना चकेरी, जनपद कानपुर नगर।
- रामू पुत्र लक्ष्मी नारायण — मकान नंबर 104, गांधीग्राम, थाना चकेरी, जनपद कानपुर नगर।
- महेंद्र सिंह पुत्र नंद किशोर — मकान नंबर 65/23, गांधीग्राम, थाना चकेरी, जनपद कानपुर नगर।
- पप्पू सरदार उर्फ हरजेंद्र सिंह पुत्र शिव सिंह — मकान नंबर 185, एन-2 रोड, रतनपुर पनकी, थाना चकेरी, जनपद कानपुर नगर।
- सरदार अजीत सिंह पुत्र अवतार सिंह — मूल निवास रायपुर रसूलपुर, थाना भीमपुर, जनपद जालंधर, पंजाब। वर्तमान निवास: मकान नंबर 135/ए, शास्त्री नगर, थाना काकादेव, कानपुर नगर।
- लालजी पुत्र घसीटे — मकान नंबर 104, गांधीग्राम, थाना चकेरी, जनपद कानपुर नगर।
- दिनेश कुमार पुत्र बुद्ध प्रकाश — मकान नंबर 476, जनता नगर, थाना नौबस्ता, जनपद कानपुर नगर। मूल निवास: कस्बा व थाना डेरापुर, जनपद कानपुर देहात।
लाइसेंसी हथियारों को अवैध बरामदगी दिखाने का आरोप
शिकायत में यह गंभीर आरोप भी लगाया गया था कि पुलिस राकेश पाठक के घर से उनकी लाइसेंसी बंदूक और राइफल जब्त करके ले गई थी। बाद में इन्हीं लाइसेंसी हथियारों को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान बरामद अवैध असलहों के रूप में दर्ज कर दिया। सीबीसीआईडी (CBCID) की जांच में हथियारों की इस कथित बरामदगी और पुलिस के फर्जी रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेज तैयार करने, झूठे मुकदमे लादने और लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने जैसे गंभीर अपराधों के प्रथम दृष्टया (प्राइम फेसी) सबूत मिलने की बात सामने आई है।
35 साल बाद दर्ज हुई FIR
इस मामले की जांच कई साल पहले ही पूरी हो चुकी थी और सीबीसीआईडी (CBCID) की अंतिम जांच रिपोर्ट 25 सितंबर 1995 को मंजूर कर ली गई थी। जांच में कुल 18 पुलिसकर्मियों की भूमिका को संदिग्ध पाया गया था, जिनमें से 6 पुलिसकर्मियों का निधन हो चुका है। वहीं, शेष 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब महाराजपुर थाने में केस दर्ज किया गया है। आरोपितों में तत्कालीन पुलिस अधिकारी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें कई सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 194, 195, 182, 211, 218, 220 और 323 सहित संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का कानूनी परीक्षण किया जाएगा।
इन 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हुआ केस
- उनि बीडी सारस्वत, सेवानिवृत्त — निवासी एमआईजी बी-206, ट्रांस यमुना कॉलोनी, एत्माद्दौला, नगर (कमिश्नरेट आगरा), उत्तर प्रदेश।
- उनि योगेन्द्र नाथ सिंह, सेवानिवृत्त — ग्राम मसौढ़ी, चरवा, कौशांबी, उत्तर प्रदेश।
- हेका हृदय नारायण तिवारी, सेवानिवृत्त — ग्राम सीतामढ़ी, कोईरीना, भदोही, उत्तर प्रदेश।
- का तेज नारायण तिवारी, सेवानिवृत्त — ग्राम सोहा, कल्यानपुर, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश।
- का बैजनाथ, सेवानिवृत्त — निवासी पसोर, चरवा, कौशांबी, उत्तर प्रदेश।
- का बृजेश कुमार, सेवारत — ग्राम रूपचन्द्रपुर, बदलापुर, जौनपुर, उत्तर प्रदेश।
- का चन्द्रबली, सेवानिवृत्त — निवासी ग्राम मवई, सराय अखिल, कौशांबी, उत्तर प्रदेश।
- का विद्याकान्त शुक्ला, सेवानिवृत्त — ग्राम नरवर चौकठा, मांडा, यमुनानगर (कमिश्नरेट प्रयागराज), उत्तर प्रदेश।
- का रामआसरे, सेवानिवृत्त — ग्राम बद्दूपुरी, करारी, कौशांबी, उत्तर प्रदेश।
- का रमेश कुमार तिवारी — ग्राम कतवारीपुर, सरायइनायत, गंगानगर (कमिश्नरेट प्रयागराज), उत्तर प्रदेश।
- आरक्षी चालक जगेश्वर यादव, सेवानिवृत्त — ग्राम गोरा, सोरांव, गंगानगर (कमिश्नरेट प्रयागराज), उत्तर प्रदेश।
- उनि विवेचक रमेश चन्द्र — निवासी ई-2/209, केशव कॉलोनी, देह, चकेरी, उत्तर प्रदेश।
35 साल बाद न्याय की उम्मीद
यह मामला दिखाता है कि किसी पुलिस कार्रवाई की आधिकारिक कहानी को भी शिकायतों, गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर चुनौती दी जा सकती है। पीड़ित परिवार लंबे समय से इस मामले में इंसाफ और कार्रवाई की गुहार लगा रहा था। अब करीब 35 साल बाद एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच का अगला चरण बेहद अहम माना जा रहा है। यह स्पष्ट करना बाकी है कि उस समय किन लोगों ने क्या भूमिका निभाई और अदालत में आरोप किस हद तक साबित हो पाते हैं। फिलहाल, 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है; उन्हें दोषी ठहराने का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ केस
- भारतीय दंड संहिता, 1860 — धारा 194
- भारतीय दंड संहिता, 1860 — धारा 195
- भारतीय दंड संहिता, 1860 — धारा 182
- भारतीय दंड संहिता, 1860 — धारा 211
- भारतीय दंड संहिता, 1860 — धारा 218
- भारतीय दंड संहिता, 1860 — धारा 220
- भारतीय दंड संहिता, 1860 — धारा 323
- भारतीय दंड संहिता, 1860 — धारा 342