Kiren Rijiju Statement : दुनिया के कई हिस्सों में फैली अशांति और हिंसा के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बड़ा खुलासा किया है। आज सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर उन्होंने दावा किया कि जिस तरह बांग्लादेश में भीषण तख्तापलट और फ्रांस में बड़े पैमाने पर दंगे, आगजनी एवं लूटपाट देखने को मिली, ठीक उसी ढर्रे पर भारत में भी अराजकता फैलाने का बड़ा षड्यंत्र रचा गया था। केंद्रीय मंत्री ने देश विरोधी तत्वों को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का केवल एक लोकतांत्रिक माध्यम है-और वह है चुनाव। जॉर्ज सोरोस जैसे विदेशी पैसों के दम पर चलाया जाने वाला कोई एजेंडा नहीं।

'देश विरोधी गिरोहों और राजनेताओं ने रची थी हिंसा की साजिश'

रिजिजू ने पोस्ट में लिखा कि देश के भीतर मौजूद कुछ भारत-विरोधी गिरोहों और नेताओं ने मिलकर यहां के नौजवानों को उकसाने और सड़कों पर भारी हिंसा भड़काने की पूरी तैयारी कर ली थी। वैसे, यह खतरनाक मंसूबा बनाने वाले यह भूल गए कि भारत की नींव बहुत मजबूत है और यह देश न तो बांग्लादेश की तरह कमजोर है और न ही फ्रांस जैसी परिस्थितियों से डगमगाएगा। अपने इस बयान की पुष्टि के लिए उन्होंने वीडियो क्लिप साझा की। इसमें नेहा बोरा द्वारा बांग्लादेश के उग्रवादी युवाओं का आभार जताने का क्लिप शामिल है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण का रिजीम चेंज (सत्ता बदलने) वाला बयान है। जुलाई और अगस्त में भारत में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सड़कों पर उतरे उपद्रवियों की फुटेज दिखाई गई है।

15 और 17 अक्टूबर को भी किया था करारा प्रहार

यह पहला मौका नहीं है, जब रिजिजू ने इन षड्यंत्रकारियों पर सीधा निशाना साधा है। इससे पहले भी उन्होंने अपनी बात रखी थी:

15 अक्टूबर का बयान : रिजिजू ने लिखा था कि अब देश में स्पष्ट रूप से 'लड़ाई की रेखा' खिंच चुकी है। एक तरफ शहरी-दिमागी नक्सली और अराजकता फैलाने वाले लोग खड़े हैं, तो दूसरी तरफ भारत के पवित्र संविधान में निष्ठा रखने वाले सच्चे देशभक्त नागरिक हैं। अब यह जंग सीधे तौर पर देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों और भारत की संप्रभुता की रक्षा करने वाले देशभक्तों के बीच है।

17 अक्टूबर की चेतावनी: रिजीम चेंज की वकालत करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने लिखा था-बड़े आए रिजीम चेंज करने वाले! कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग नासमझ नहीं है। आज का भारतीय युवा देश को नष्ट करने में नहीं, बल्कि उसका निर्माण करने में जुटा हुआ है। युवा वर्ग खेल जगत में मेडल हासिल कर रहा है और टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, स्किलिंग, इनोवेशन व सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत का परचम लहरा रहा है।

क्या है फ्रांस और बांग्लादेश का घटनाक्रम और जॉर्ज सोरोस का कनेक्शन?

फ्रांस की हिंसा: फ्रांस में हाल में पेंशन सुधारों, पुलिस कार्रवाई और महंगाई को लेकर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कई प्रमुख शहरों में हिंसक भीड़ ने गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया, दुकानों में तोड़फोड़ की और जमकर लूटपाट मचाई, जिससे वहां का प्रशासन पूरी तरह लाचार नजर आया।

बांग्लादेश का तख्तापलट : अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलनों और भीषण हिंसा के बाद अचानक तख्तापलट हो गया, जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भारत शरण लेनी पड़ी थी। वहां सेना और प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया था।

जॉर्ज सोरोस और रिजीम चेंज का मुद्दा: अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस पर अक्सर दुनिया भर के विभिन्न देशों में ओपन सोसाइटी फाउंडेशंस के माध्यम से अपनी पसंद की सरकारें बनवाने और राष्ट्रवादी सरकारों को गिराने के लिए फंड मुहैया कराने का आरोप लगता रहा। भाजपा और केंद्र सरकार कई बार सोरोस पर भारत के आंतरिक मामलों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश करने का आरोप लगा चुकी है। रिजिजू का इशारा इसी तरफ था कि भारत में किसी विदेशी फंडिंग से सरकार नहीं बदली जा सकती।