पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भीषण भगदड़ के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। चोरबागान इलाके में हुए इस दर्दनाक हादसे के सिलसिले में पूजा आयोजन समिति के पदाधिकारियों सहित 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है, ताकि हादसे के पीछे की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। 

बारिश और भारी भीड़ की वजह से बिगड़े हालात

यह घटना शनिवार शाम करीब 7:40 बजे गिरिश पार्क थाना क्षेत्र के अंतर्गत चोरबागान के सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई। उस समय पंडाल में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। इसी दौरान बारिश शुरू होने से बाहर कतार में खड़े श्रद्धालु अंदर की ओर बढ़ने लगे।भीड़ का दबाव बढ़ने पर कुछ लोग सड़क पर गिर पड़े और देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई। हादसे में लोगों की जान चली गई और कई श्रद्धालु घायल हो गए। 

आयोजकों से पूछताछ, जांच के आदेश

कोलकाता पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए 12 लोगों में पूजा पंडाल के कुछ आयोजक भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे और हादसे के वक्त सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन हुआ था या नहीं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है। उन्होंने संकेत दिया कि जांच की निगरानी के लिए मौजूदा न्यायाधीश की देखरेख में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) गठित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। 

मृतक परिवारों को 25 लाख की मदद, सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के लिए 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। हादसे में घायल लोगों का अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी घायलों का हाल जानने के लिए अस्पताल भी पहुंचे। घटना के बाद पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन दल और चिकित्सा टीमों ने राहत कार्य संभाला। सुरक्षा के मद्देनजर पंडाल को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। 

पुलिस ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

हादसे से संबंधित सहायता और जानकारी के लिए कोलकाता पुलिस के लालबाजार कंट्रोल रूम की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं:

1800-345-5678

033-2214-1310

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ और घटनास्थल पर मौजूद व्यवस्थाओं की पड़ताल के बाद हादसे की जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है।