पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ को लेकर पुलिस ने घटना की शुरुआती जानकारी साझा की है। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार शाम बारिश के कारण पंडाल में अचानक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भीड़ का दबाव अत्यधिक बढ़ने से निकास द्वार के पास भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 19 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
शाम करीब 7:40 बजे बिगड़े हालात
पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार शाम करीब 7:40 बजे गिरिश पार्क थाना क्षेत्र के शारदा पार्क स्थित चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल के निकास द्वार के पास हुई। उस समय बारिश हो रही थी और पंडाल देखने आए लोगों की संख्या काफी बढ़ गई थी। बारिश के कारण भीड़ का दबाव अचानक बढ़ने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। इसी दौरान कुछ लोग सड़क पर गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद राहत एवं बचाव दलों को तत्काल मौके पर भेजा गया।
करीब 35 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया
कोलकाता पुलिस के मुताबिक, घायलों को तुरंत रेस्क्यू कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MCH) पहुंचाया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, करीब 35 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मौके पर पुलिस बल के अतिरिक्त दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन दल और चिकित्सा टीमों को तैनात किया गया। घटना के बाद संबंधित पूजा पंडाल को आम लोगों के प्रवेश के लिए बंद कर दिया गया। प्रशासन का ध्यान घायलों के उपचार और स्थिति को नियंत्रित करने पर केंद्रित रहा।
संकरे रास्तों और भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल
हादसे के बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने पंडाल के प्रवेश और निकास द्वार संकरे होने तथा रोशनी की कमी की शिकायत की। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बारिश शुरू होने पर श्रद्धालु तेजी से अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे भीड़ और बढ़ गई। पुलिस इन परिस्थितियों और भीड़ प्रबंधन में संभावित चूक की जांच कर रही है। शुरुआती बयान में बारिश और भारी भीड़ को घटना से जुड़ा प्रमुख कारण बताया गया है, हालांकि हादसे के सभी कारणों और किसी संभावित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हादसे के बाद वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों के उपचार की जानकारी ली। राज्य सरकार ने घटना की जांच कराने की बात कही है। पुलिस पूजा आयोजकों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है। इस घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षित प्रवेश-निकास, पर्याप्त रोशनी, भीड़ की आवाजाही पर नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्था की अहमियत को फिर सामने ला दिया है।