Maharashtra FDA Action News : महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने एक्सपायर हो चुके, खराब और रिजेक्ट किए गए खाद्य उत्पादों की हेराफेरी व अवैध बिक्री के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। राज्य के ठाणे और पुणे जिलों में की गई इस ताबड़तोड़ छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कुल 48,09,924 रुपये की कीमत का संदिग्ध खाद्य स्टॉक जब्त किया है। इस मामले में पुलिस ने ठाणे के शांति नगर पुलिस थाने में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के एक डायरेक्टर समेत कुल 10 नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
किन-किन लोगों और कंपनियों पर गिरी गाज?
दर्ज एफआईआर में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकइट और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े बड़े वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों के अलावा डिस्पोज़ल एजेंसी चलाने वाले और स्थानीय सप्लायरों के नाम शामिल हैं।
मुख्य आरोपियों में ये नाम
- रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के होल-टाइम डायरेक्टर वी। सुब्रमण्यम और अशोक कुमार सिंह।
- रिलायंस रिटेल लिमिटेड के नॉमिनी विजय भिकाजी खर्माले और वेयरहाउस मैनेजर नीलेश रामदासराव देशमुख।
- ब्लिंकइट कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के होल-टाइम डायरेक्टर अर्बिंदर सिंह ढींसा और दीपक सिंह।
- ज़ोमैटो हाइपरप्योर प्राइवेट लिमिटेड के आबिद शेख।
- एम/एस बी के डिस्पोज़ के बाबर मियां अहमद सिद्दीकी।
- भिवंडी के सप्लायर गुलजार अब्दुल खान, भिवंडी के चविंद्र और वहां के डिस्काउंट स्टोर के अब्दुल मोबिन खान।
- इन सभी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है।
ठाणे और पुणे में कैसे हुआ खेल का पर्दाफाश?
एफडीए की यह कार्रवाई 14 और 15 अक्टूबर के बीच ठाणे और पुणे जिलों में कई ठिकानों पर एक साथ की गई। इसके लिए एफडीए ने असिस्टेंट कमिश्नर और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कुल सात टीमें बनाई थीं।
जांच के दौरान अलग-अलग जगहों से भारी मात्रा में माल जब्त
- भिवंडी के एक डिस्पोज़ल यार्ड से 24 लाख रुपये से ज्यादा के उत्पाद।
- वदपे में स्थित रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के वेयरहाउस से 4.92 लाख का स्टॉक।
- उसताने में जोमैटो हाइपरप्योर की सुविधा से 7.81 लाख का स्टॉक।
क्या था पूरा फर्जीवाड़ा और कैसे खपाया जाता था माल?
एफडीए की शुरुआती जांच में एक बड़ा रैकेट सामने आया है। इसके मुताबिक जो खाद्य उत्पाद एक्सपायर हो चुके थे, खराब थे या जिन्हें ग्राहकों ने वापस कर दिया था और नियम के तहत नष्ट किया जाना था, उन्हें नष्ट करने के बजाय डिस्पोज़ल एजेंसियों, बिना लाइसेंस वाले सॉर्टिंग यार्ड और दलालों के जरिए चुपचाप वापस मार्केट में सप्लायरों और रिटेलर्स तक पहुंचा दिया जाता था, ताकि इन्हें आम उपभोक्ताओं को बेचा जा सके। आरोप है कि डिस्पोज़ल एजेंसियों ने बिना किसी पुख्ता जांच के फर्जी सर्टिफिकेट और दस्तावेज जारी कर दिए थे, जिनमें दावा किया जाता था कि सारे उत्पाद नष्ट कर दिए गए हैं। एफडीए को डिस्पोजल रिकॉर्ड में भी भारी गड़बड़ियां मिलीं, जैसे कि सामान की मात्रा में अंतर होना और भेजने व प्राप्त करने वालों के विवरण का मेल न खाना।
बिना लाइसेंस वाले यार्ड में छांटा जाता था स्टॉक
इस गोरखधंधे के तहत इस सारे स्टॉक को भिवंडी के एक बिना लाइसेंस वाले यार्ड में ले जाकर छांटा जाता था। वहां जो पैकेट देखने में ठीक-ठाक लगते थे, उन्हें अलग करके दलालों और सप्लायरों को बेच दिया जाता था। बाद में भिवंडी के गुलजार नगर में ऐसा रिटेल आउटलेट भी मिला, जो बिना किसी लाइसेंस या खरीद बिल के चल रहा था और वहां एक्सपायर हो चुके व लीक हो रहे उत्पाद खुलेआम बिक्री के लिए रखे गए थे।
एफडीए की सख्त कार्रवाई और लाइसेंस सस्पेंड
- छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने मौके पर स्टॉक की पूरी सूची बनाकर उसे जब्त किया, जरूरी सैंपल लिए, बयान दर्ज किए और पकड़े गए उत्पादों को कहीं और ले जाने, बेचने या नष्ट करने पर तुरंत रोक लगाने के निर्देश जारी किए। 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद एफडीए ने पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस पूरी तरह सस्पेंड कर दिए हैं, जबकि बिना लाइसेंस के चल रही चार अन्य जगहों पर व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।