Neha Bora On CJP : दिल्ली हाईकोर्ट में आइसा (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की ओर से दायर मामले पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को एक अहम बात सामने आई है। नेहा के वकील और सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को साफ-साफ बताया कि 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जो विरोध-प्रदर्शन किया था, उससे नेहा बोरा का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। नेहा बोरा ने यह याचिका दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें जारी किए गए उस नोटिस के खिलाफ लगाई है, जिसमें उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पीस बॉन्ड की तामील के लिए पेश होने को कहा गया था। अदालत में नेहा की पैरवी कर रहे सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने उनकी हिरासत को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार दिया। उन्होंने जज के सामने सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी इंसान को ऐसा नोटिस मिलता है तो वह पहली नजर में यही सोचता है कि आखिर वह इसका जवाब कैसे दे और पुलिस किस आधार पर इस नतीजे पर पहुंच गई है।

महज 10-15 मिनट में ले लिया गया था हिरासत में

वकील ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि 16 अक्टूबर की शाम को जब नेहा बोरा मंडी हाउस के इलाके में विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंची थीं तो महज 10 से 15 मिनट के भीतर ही उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उस वक्त तक उन्होंने ऐसा कोई अपराध नहीं किया था जिसके लिए उन्हें दोषी ठहराया जा सके। उन्होंने केवल कुछ नारे ही लगाए थे और पुलिस ने उन्हें तुरंत डिटेन कर लिया। वकीलों का मानना है कि यह पूरी कार्रवाई एक अवैध हिरासत थी। इसके बाद नेहा ने सीजेपी (CJP) के उस प्रोटेस्ट कॉल से पूरी तरह दूरी बना ली थी, क्योंकि वह विरोध प्रदर्शन किसी दूसरे संगठन द्वारा बुलाया गया था।

क्या है पूरा मामला और पीस बॉन्ड का विवाद?

दरअसल, पुलिस ने हिरासत से रिहा करने के बाद 17 अक्टूबर को नेहा बोरा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत एक नोटिस भेजा था। इस नोटिस के जरिए उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने और यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि क्यों न उनसे इस जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने की शर्त पर 10 हजार रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और एक जमानतदार भरवाया जाए। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सीजेपी का विरोध-प्रदर्शन किसी अन्य संगठन ने आयोजित किया था, जबकि नेहा ने केवल मंडी हाउस की तरफ जाने का कॉल दिया था। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज यह एक चलन बन गया है कि जब भी लोग शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते हैं, पुलिस उन्हें उठाकर ले जाती है। हालात यह होते हैं कि उन्हें अपने वकील तक से संपर्क करने की इजाजत नहीं दी जाती और उनके अधिकारों की अनदेखी की जाती है।