Asaduddin Owaisi latest Statement : ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान के बाद देश का राजनीतिक पारा फिर चढ़ गया है। ओवैसी ने कहा था कि मुस्लिम युवाओं को अब नेहरू-गांधी या यादव परिवार के नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय खुद नेतृत्व संभालना चाहिए। उनके बयान पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तीखा हमला बोला है। कल यानी 18 अक्टूबर को रामपुर में ओवैसी ने कहा था कि उनकी पार्टी मुस्लिम नौजवानों को मजबूत राजनीतिक मंच दे रही। मुस्लिम युवकों में भी अन्य समुदायों जैसी ही योग्यताएं हैं, लेकिन पारंपरिक राजनीति में उन्हें कभी आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया गया।

ओवैसी का बड़ा दावा-अब अब्दुल नेता और सांसद बनेगा

ओवैसी ने बड़े राजनीतिक घरानों पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हम अब किसी नेहरू, गांधी या यादव को अपना नेता नहीं मानेंगे। हमारी अग्रिम पंक्ति में खड़े युवा लड़के-लड़कियां हमारे असली नेता होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पारंपरिक दल मुस्लिम कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल केवल जमीनी मेहनत के लिए करते हैं, जबकि बड़े और शक्ति वाले पद अन्य समुदायों के पास चले जाते हैं। एआईएमआईएम चाहती है कि मुस्लिम युवा खुद विधायक और सांसद बनकर आगे आएं, ताकि वे हाशिये पर मौजूद वर्गों को सही न्याय दिला सकें। अब अब्दुल केवल कार्यकर्ता नहीं रहेगा, बल्कि वह खुद नेता, विधायक और सांसद बनेगा।

विपक्षी दलों ने इस तरह साधा निशाना

समाजवादी पार्टी की कड़ी प्रतिक्रिया

सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर ने ओवैसी पर समाज में विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का मतदाता काफी समझदार है और वह जानता है कि राज्य के भले के लिए क्या सही है। हैदर ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम के खराब प्रदर्शन की याद दिलाते हुए कहा कि ऐसे बयान देना ओवैसी का पुराना तरीका है। जनता को एक ऐसे नेतृत्व की दरकार है, जो सबको साथ लेकर चले, न कि सांप्रदायिक आधार पर बांटे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक), सामाजिक न्याय, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी उन लोगों से राजनीतिक दूरी बनाए रखेगी जो महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के योगदान का सम्मान नहीं करते। राजपूत ने ओवैसी पर मौलाना अबुल कलाम आजाद की आलोचना करने का भी आरोप लगाया और कहा कि जो लोग राष्ट्रीय प्रतीकों और महापुरुषों को निशाना बनाते हैं, वो देशभक्त नहीं कहे जा सकते। ओवैसी भले भाषण में आक्रामक भाषा अपनाते हों, मगर पर्दे के पीछे से वे इंडिया गठबंधन के साथ समझौते का प्रयास करते हैं। इसी क्रम में दिल्ली से कांग्रेस नेता उदित राज ने ओवैसी और भाजपा को एक ही सिक्के का दो पहलू बताया। उन्होंने कहा कि जहां भाजपा खुद को हिंदुओं का ठेकेदार साबित करने में लगी है। वहीं ओवैसी मुसलमानों के ठेकेदार बनना चाहते हैं। दोनों ही ताकतें देश में सांप्रदायिकता फैला रही हैं और इनसे सतर्क रहने की जरूरत है।

राजद ने उठाया बहुलवादी परंपरा का मुद्दा

पटना में राजद के वरिष्ठ नेता और सांसद मनोज झा ने कहा कि विचार व्यक्त करने की आजादी सभी को है, लेकिन किसी को भी अन्य दलों के अधिकार छीनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के राजनीतिक और बौद्धिक इतिहास में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद और डॉ. बीआर आंबेडकर जैसी महान हस्तियों का अमूल्य स्थान रहा है। भारत की असली पहचान उसकी बहुलवादी सोच है, जहां कभी भी केवल एक विचारधारा या एक सोच थोपी नहीं जा सकती।