दिल्ली में आज मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ मार्च का आह्वान किया गया है। ‘People Against SIR’ गठबंधन की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग उठाई जाएगी। अभिजीत दिपके और छात्र नेता नेहा बोरा समेत कई चर्चित चेहरों की भागीदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। 

कौन-कौन से चेहरे हो सकते हैं शामिल?

इस मार्च के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा, छात्र नेता आइशी घोष और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनके अलावा अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज, किसान नेता राकेश टिकैत और लेखक तुषार गांधी के नाम भी संभावित प्रतिभागियों में शामिल हैं। आमंत्रित किए गए सभी लोगों की भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इनमें से कौन-कौन मार्च में शामिल होगा। 

क्या है प्रदर्शन का मकसद?

आयोजकों का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर गंभीर सवाल हैं। गठबंधन इस प्रक्रिया को समाप्त करने, मतदाता सूची को 2024 से पहले की स्थिति में बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहा है। गठबंधन ने अपने अभियान के लिए ‘हर गली जंतर-मंतर, हर गांव जंतर-मंतर, मेरा घर जंतर-मंतर’ का नारा दिया है। इसके जरिए आयोजक चाहते हैं कि विरोध प्रदर्शन केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि देशभर में स्थानीय स्तर पर भी लोग अपनी आवाज उठाएं। 

दिल्ली में मार्च का संभावित रास्ता

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राजधानी में प्रस्तावित मार्च बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास से शुरू होकर पटेल चौक के नजदीक स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ सकता है। आयोजकों ने संकेत दिया है कि यदि पुलिस मार्च को आगे बढ़ने से रोकती है, तो प्रदर्शनकारी ‘जन संसद’ आयोजित कर सकते हैं और राष्ट्रगान के बाद वहां से हट सकते हैं।

पुलिस की पाबंदियों के बीच बढ़ी चुनौती

नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने की जानकारी है। इसके तहत लिखित अनुमति के बिना पांच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े, जुलूस, प्रदर्शन और कुछ अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध है। आयोजक पहले ही कह चुके हैं कि वे मार्च के लिए पुलिस से अनुमति नहीं मांगेंगे। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती हो सकता है। खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से प्रस्तावित मार्च को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। 

पहले भी हिरासत में लिए जा चुके हैं कई नेता

दिल्ली में SIR के विरोध को लेकर इससे पहले भी कई प्रदर्शन हुए हैं। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च से पहले अभिजीत दिपके, नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने भी विरोध दर्ज कराया है। इसकी सफलता और प्रमुख नेताओं की भागीदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि आमंत्रित चेहरे इसमें शामिल होते हैं या नहीं और पुलिस प्रदर्शन को लेकर क्या कदम उठाती है।