Raja Bhaiya Arms News : विजया दशमी पर आज उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा स्थित प्रसिद्ध बेंती कोठी फिर सुर्खियों में है। कुंडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने अपनी पुरानी परंपरा को निभाते हुए विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन किया। राजा भैया सिर पर केसरिया पगड़ी सजाए नजर आए। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच उन्होंने अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजा की। इस दौरान बेंती कोठी में 500 से अधिक हथियारों की पूजा की गई। इनमें कई आधुनिक और अत्याधुनिक हथियार भी शामिल हैं। इस धार्मिक और पारंपरिक आयोजन में हिस्सा लेने के लिए काफी संख्या में उनके समर्थक भी अपने-अपने लाइसेंसी असलहों के साथ बेंती कोठी पहुंचे थे।
वर्षों पुरानी परंपरा और सनातन संस्कृति का प्रतीक
दशहरे के दिन बेंती कोठी में शस्त्रों की पूजा करने का यह चलन नया नहीं है। यह वर्षों पुरानी परंपरा का अहम हिस्सा है। इस पूरे अनुष्ठान के दौरान बकायदा आरती उतारी गई, प्रसाद वितरण हुआ। अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी हुए। राजा भैया का मानना है कि यह आयोजन हमारी सनातन संस्कृति की महान परंपरा और असत्य पर सत्य की विजय का जीवंत प्रतीक है। वैसे, बेंती कोठी में सजे इन हथियारों और बंदूकों की तस्वीरें केवल धार्मिक कारणों से चर्चा का विषय नहीं बनती हैं। यह आयोजन इस बात की भी गवाही देता है कि कुंडा से लखनऊ के गलियारों तक राजा भैया का राजनीतिक रसूख और प्रभाव कितना मजबूत है।
3 दशकों से अधिक का लंबा राजनीतिक सफर
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का राजनीतिक सफर 3 दशक से ज्यादा पुराना और बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 1993 में पहली बार कुंडा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार 7 बार विधायक बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह उत्तर प्रदेश सरकार में पांच अलग-अलग बार मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वक्त के साथ उन्होंने नई राजनीतिक पहचान बनाते हुए जनसत्ता दल लोकतांत्रिक नाम से अपनी अलग पार्टी का गठन कर लिया।
कुंडा में राजा भैया की मजबूत पकड़
कुंडा में उनकी पकड़ इतनी मजबूत है कि उनके समर्थकों के बीच उनका प्रभाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। वैसे, बाहुबली छवि और समय-समय पर विभिन्न विवादों को लेकर भी उनका नाम काफी चर्चा में रहा है। वैसे, किसी पर लगे आरोप और अदालत में कानूनी रूप से साबित हुआ अपराध दोनों बिल्कुल अलग-अलग विषय होते हैं।
हर साल होती है शस्त्र पूजा
हर साल विजया दशमी आते ही बेंती कोठी का यह शस्त्र पूजन कार्यक्रम अपने आप में बड़ा चर्चा का विषय बन जाता है। जहां एक तरफ उनके समर्थक इसे हमारी सांस्कृतिक विरासत और पुरानी परंपरा का अटूट हिस्सा मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक विश्लेषक इसे राजा भैया के दशकों से कायम सियासी रुतबे और ताकत की एक झलक के रूप में देखते हैं। कुंडा की सियासत में इस परंपरा का जिक्र हर साल दशहरे के आते ही फिर से ताजा हो जाता है।