राजस्थान के फलोदी जिले के नौसर गांव में बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को बचाने की कोशिशें नाकाम रहीं। लगभग 39 घंटे तक चले चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार, सुबह 3:25 बजे मासूम को बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया।

1050 फीट गहरा था बोरवेल

जानकारी के अनुसार, बोरवेल की गहराई 1050 फीट से अधिक थी और भोमाराम 600 फीट से ज्यादा नीचे फंसा हुआ था। बचाव दल को बच्चे तक पहुंचने में कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बोरवेल के भीतर फंसे पत्थर, नमी और पानी के कारण कैमरे से बच्चे की स्थिति पर नजर रखना भी मुश्किल हो गया था। पुलिस के अनुसार, भोमाराम के पिता पांचाराम भील के खेत में बोरवेल की मशीन खराब हो गई थी। मरम्मत के लिए मशीन और पंप निकालने का काम चल रहा था। इसी दौरान पास में मौजूद भोमाराम खुले बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन को सूचना दी गई। 

NDRF और SDRF ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन के साथ राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें मौके पर जुटी रहीं। बच्चे को बाहर निकालने के लिए आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ पारंपरिक तकनीकों का भी सहारा लिया गया। विशेषज्ञों ने लोहे की सरियों से विशेष उपकरण तैयार कर बचाव के भरसक प्रयास किए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद भोमाराम को नहीं बचाया जा सका।

परिवार और गांव में मातम

भोमाराम को सुरक्षित निकालने की उम्मीद में परिजन और ग्रामीण लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन पर नजर रखे हुए थे। करीब 39 घंटे की कोशिशों के बाद जब बच्चे का शव बाहर निकाला गया, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शव को आगे की प्रक्रिया के लिए अस्पताल भेजा गया। इस दर्दनाक हादसे ने खुले और असुरक्षित पड़े बोरवेलों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।