Mohan Bhagwat Statement : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर के संघ मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव के दौरान देश और दुनिया के हालात को लेकर कई बड़ी बातें कहीं। संघ की स्थापना 1925 में इसी दिन हुई थी और इस साल भी हर साल की तरह यह स्थापना दिवस बड़े पैमाने पर मनाया गया। मोहन भागवत ने देश को आगाह किया कि जिस तरह बांग्लादेश और फ्रांस में हालात बिगाड़ने की कोशिशें हुईं, वैसी ही चालें भारत में भी चली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में कुछ ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो भारत को आगे बढ़ने से रोकना चाहती हैं। इन ताकतों का मकसद केवल सत्ता बदलना या सुधार करना नहीं है, बल्कि देश की कुर्सी पर अपने इशारों पर नाचने वाले लोगों को बैठाना है। उन्होंने यह भी साफ किया कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को आपस में बांटना चाहते हैं, जिन्हें कुछ नेताओं का भी अंदरूनी समर्थन हासिल है।

सीएम फडणवीस समेत कई बड़े नेता रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में शस्त्र पूजन भी किया गया, जिसमें देश की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं। इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ पहुंचे थे। उनके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच भी इस खास मौके पर मौजूद रहे।

भागवत के भाषण की 5 अहम बातें

आंदोलन का मकसद सिर्फ समाधान हो, आपसी फूट नहीं : समस्याओं के उभरने पर प्रदर्शन और आंदोलन होना स्वाभाविक है। मगर, उनका असल उद्देश्य किसी समस्या का समाधान ढूंढना होना चाहिए। आंदोलनों की वजह से समाज में नफरत या विभाजन नहीं फैलना चाहिए। कई बार ऐसा देखा गया है कि आंदोलनों का गलत इस्तेमाल किया जाता है और वे शुद्ध रूप से राजनीति का जरिया बन जाते हैं। देश और समाज को चलाने की जिम्मेदारी सिर्फ नेताओं की नहीं होती, बल्कि जब तक समाज खुद सक्रिय नहीं होता, तब तक समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं मिल सकता।

एकता की ताकत से देश सुरक्षित रहेगा : वैश्विक स्तर पर कई ताकतें ऐसी हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। हमें उनके उकसावे में आकर उत्तेजना में नहीं आना चाहिए। लॉर्ड कर्जन ने हिंदू और मुस्लिम के नाम पर बंगाल को बांटने की कोशिश की थी, जिसे जनता के विरोध के चलते 4 साल बाद ही वापस लेना पड़ गया था। वैसे, 1947 में देश के बंटवारे को नहीं रोका जा सका, क्योंकि लोगों के दिलों में यह बात घर कर चुकी थी कि जो शक्ल से अलग दिखते हैं, वे पूरी तरह से अलग ही हैं।

पूर्वज एक, सबको साथ लेकर आगे बढ़ें : हम सभी देशवासियों के पूर्वज एक ही हैं। हमारी साझा संस्कृति की जड़ें भी एक ही हैं। किसी भी व्यक्ति की अलग पहचान को मिटाए बिना, सबको साथ लेकर चलना बेहद जरूरी है। भारतीय परंपरा और प्राचीन विचारों में इतनी ताकत है कि वे आज की दुनिया की तमाम बड़ी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं।

विकास हो, लेकिन प्रकृति को नुकसान न पहुंचे : भागवत ने नेपाल में आई बाढ़ का उदाहरण देकर कहा कि आज के समय में विकास के लिए नई तकनीक को अपनाना बहुत जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में पर्यावरण-प्रकृति को तबाह नहीं किया जाना चाहिए। तरक्की का मॉडल ऐसा होना चाहिए, जिसमें अर्थव्यवस्था के साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों का पूरा तालमेल बैठाया जाए।

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लगाम और एआई का सही इस्तेमाल : आज के डिजिटल दौर में लोगों के पास हर तरह की जानकारी आसानी से पहुंच रही है, लेकिन बिना सही और गलत की पहचान किए उसका इस्तेमाल करने से बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए कड़े नियम तय किए जाने चाहिए और सरकार तथा प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल भी पूरी समझदारी और सही दिशा में किया जाना अनिवार्य है।