दलेर मेहंदी का उत्तराखंड में सांस्कृतिक कार्यक्रम से जो वीडियो वायरल हो रहा है, उस पर फैंस और सेलेब्स के अलग-अलग रिएक्शंस सामने आ रहे हैं। दलेर मेहंदी स्टेज पर ठीक से गा नहीं पा रहे थे और देखकर मंत्री ने उनपर सबके सामने चिल्लाया और नशे में धुत होने के आरोप भी लगाए। ये मुद्दा इस वक्त काफी गरमाया हुआ है। इसी बीच सिंगर सोना महापात्रा ने भी इस मामले में खुलकर अपना पक्ष रखा है। सोना महापात्रा ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए दलेर मेहंदी से जुड़ा एक और किस्सा बताया। चलिए जानते हैं इस मामले पर सोना का क्या कहना है।
सोना महापात्रा ने बताया दलेर मेहंदी से जुड़ा किस्सा
सोना महापात्रा ने लिखा, 'मैंने दलेर मेहंदी जी की परफॉरमेंस को लेकर चल रही उत्तराखंड कंट्रोवर्सी देखी है और मुझे अपना पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर करने की जरूरत महसूस हो रही है। किसी वरिष्ठ कलाकार का अपमान करने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए है क्योंकि यहां हम सभी के लिए एक बड़ा और असहज सवाल खड़ा होता है। 28 फरवरी 2026 को दिल्ली में हुए सूफी हेरिटेज फेस्टिवल की पहली शाम में मेरी मैं परफॉरमेंस थी। अगली शाम, 1 मार्च को क्लोजिंग एक्ट दलेर जी की थी। आर्टिस्ट्स अपने शो के बाद रुकते नहीं हैं, लेकिन यास्मीन और हिमांशु, और उनकी बेहतरीन टीम ने हमारी एक रात और ठहरने की गुजारिश को मान लिया। हम लीजेंड को परफॉर्म करते देखने के लिए एक्साइटेड थे। लेकिन जो हुआ वो दिल तोड़ने वाला था।'
दलेर मेहंदी का परफॉरमेंस देख हुई थी निराशा
सोना महापात्रा ने आगे खुलासा करते हुए बताया, 'जहां से हम देख रहे थे, दलेर जी कुछ असमंजस में लग रहे थे। उन्हें सुर पकड़ने में दिक्कत हो रही थी और वो एक ही म्यूजिकल फ्रेज रिपीट कर रहे थे। पूरा प्रोडक्शन बहुत निराशाजनक रहा। हमने ऑडियंस को धीरे-धीरे जाते देखा- जो लोग अच्छे-खासे पैसे देकर और बड़ी उम्मीदों के साथ आए थे। मेरी अपनी टीम इस बात पर यकीन ही नहीं कर पा रही थी। मुझे उन आयोजकों के लिए बुरा लगा जिन्होंने अपने रिसोर्स, अपनी इज्जत और मेहनत एक रिस्पेक्टेड आर्टिस्ट को लाने के लिए लगाई थी। फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। न मेरी टीम ने, न मैंने। हम वहां असहज और, लेकिन चुपचाप खड़े रहे। सम्मान के कारण। क्या वो वाकई सम्मान था? या फिर अपनी खामोशी से हम किसी ऐसी चीज को होने दे रहे थे, जिस पर सवाल होना चाहिए था?'
सोना महापात्रा ने विवाद पर दी अपनी राय
सिंगर ने आखिर में लिखा, 'मुझे दलेर जी के निजी हालात या उनकी हेल्थ के बारे में नहीं पता। मैं ये भी मानती हूं कि पब्लिक्ली आर्टिस्ट को ह्यूमिलिएट करना कोई समाधान नहीं है। लेकिन उत्तराखंड कंट्रोवर्सी में पूरी बातचीत आर्टिस्ट के अपमान पर हो रही है और ऑडियंस की उम्मीदों और प्रोफेशनल फीस लेने वालों की जिम्मेदारी के बारे में कम हो रही है। एक अनुभवी आर्टिस्ट जीवनभर के योगदान के लिए सम्मान, सहानुभूति और आभार का हकदार है। ऑडियंस एक ईमानदार परफॉरमेंस की हकदार हैं और अगर कम से कम उन्हें इस बात की ईमानदारी से जानकारी मिलनी चाहिए कि ये मुमकिन नहीं है। अगर कोई ठीक नहीं है, तो तो सहानुभूति होनी चाहिए और हालात को संभालने के लिए जिम्मेदार तरीका होना चाहिए। लेकिन ये ऑडियंस और ऑर्गनाइजर्स के लिए ठीक नहीं है कि बार-बार वो नुकसान झेलें, जबकि आर्टिस्ट के आस-पास के सभी लोग दूसरी तरफ देखें।'