सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को पॉक्सो (POCSO) कोर्ट का पीठासीन अधिकारी बनाए रखने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रशासन से जवाब मांगा है। संबंधित न्यायिक अधिकारी पर दिल्ली में एक महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है और दिल्ली पुलिस इस मामले में उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि ऐसे मामले का सामना कर रहे न्यायिक अधिकारी को कम से कम न्यायिक जिम्मेदारियों से अलग किया जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है।

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अशोक भारतेन्दु से जुड़ा है मामला

यह मामला उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अशोक भारतेन्दु से संबंधित है, जो शामली के कैराना स्थित पॉक्सो कोर्ट में पीठासीन अधिकारी के रूप में तैनात हैं। उनके खिलाफ दिल्ली में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज है। शिकायतकर्ता महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उन्हें इस संवेदनशील न्यायिक जिम्मेदारी से हटाने की मांग की है। महिला की ओर से पेश अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह ने दलील दी कि न्यायिक अधिकारी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला चल रहा है और संबंधित अदालत में बच्चों के यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में कम से कम उन्हें न्यायिक कार्यों से अलग किया जाना चाहिए।

शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप

महिला ने 8 दिसंबर 2022 को दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उसकी मुलाकात न्यायिक अधिकारी से एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी। महिला का आरोप है कि अधिकारी ने शादी का बार-बार भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जनवरी 2023 में दिल्ली पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट से अनुमति मांगी थी। मार्च 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था, लेकिन जांच जारी रखने की अनुमति भी दी थी।

दिल्ली पुलिस दाखिल कर चुकी है चार्जशीट

जांच के दौरान पुलिस ने महिला का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया। जून 2023 में दिल्ली पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को रिमाइंडर भेजकर जांच आगे बढ़ाने की अनुमति पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया। इस पर हाई कोर्ट की ओर से बताया गया कि अधिकारी के खिलाफ पहले से विजिलेंस जांच चल रही है। अक्टूबर 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने जांच की अनुमति दी और संबंधित अधिकारी को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दुष्कर्म के आरोप में चार्जशीट दाखिल की। दिल्ली की अदालत ने भी चार्जशीट पर संज्ञान लिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले याचिका की थी खारिज

शिकायतकर्ता ने इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर न्यायिक अधिकारी को पद पर बने रहने से रोकने की मांग की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने 17 अगस्त को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद महिला ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारी को न्यायिक कार्य से अलग करने का प्रशासनिक फैसला हाई कोर्ट को लेना चाहिए। साथ ही, अदालत ने विजिलेंस जांच की स्थिति पर भी सवाल उठाया और संकेत दिया कि हाई कोर्ट से जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए उचित कदम उठाने को कहा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल न्यायिक अधिकारी को पद से हटाने का आदेश नहीं दिया है। मामले में अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी।