Tata Trusts Hospitals : देश के भीतर बेहतरीन मेडिकल सुविधाएं पाना आम लोगों के लिए बहुत बड़ी बाधा बना है। खासकर उनके सामने जो भारी-भरकम इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। इस गंभीर समस्या को हल करने के वास्ते टाटा ट्रस्ट्स ने देश के अंदर 40 से 50 नॉन-प्रॉफिट अस्पताल बनाने का बीड़ा उठाया है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने वित्त वर्ष 2025-26 की एनुअल रिपोर्ट में इस योजना और संस्था के आगामी संकल्पों का जिक्र किया है।
क्रॉस सब्सिडी मॉडल पर चलेंगे अस्पताल
ये अस्पताल खास क्रॉस-सब्सिडी के सिद्धांत पर चलाए जाएंगे। इसका मतलब है कि जो मरीज इलाज का पूरा पैसा चुकाने में सक्षम हैं, उनसे मिलने वाली फीस या राशि का इस्तेमाल उन गरीब तथा जरूरतमंद लोगों का मुफ्त या सस्ता इलाज करने में किया जाएगा, जो पैसे की तंगी के चलते अस्पताल नहीं जा पाते। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उच्च कोटि की चिकित्सा सेवाओं का दायरा बढ़ा समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है।
क्या बोले नोएल टाटा?
ट्रस्ट की इस रिपोर्ट में नोएल टाटा ने इस बात पर खास जोर दिया है कि समूह के कामकाज का आंकलन इस बात से बिल्कुल नहीं होगा कि उन्होंने कुल कितना धन खर्च किया, बल्कि इसका पैमाना होगा कि उन्होंने समाज को कितने ठोस और मापने योग्य नतीजे दिए हैं। समूह का मुख्य लक्ष्य ऐसे मजबूत पब्लिक इंस्टीट्यूशंस बनाना है, जो आने वाले लंबे समय तक देश की सेवा करते रहें। अपने संदेश में नोयल टाटा ने बताया कि अब केवल यह सवाल पूछना काफी नहीं है कि ट्रस्टों ने कितना योगदान दिया है। उन्होंने कहा, परोपकार का असली दायरा सिर्फ मदद पाने वाले लोगों की गिनती करने या खर्च पैसों का हिसाब लगाने से कहीं अधिक व्यापक होना चाहिए।
5 वर्ष का हेल्थकेयर एक्शन प्लान
टाटा ट्रस्ट्स ने आगामी 5 वर्षों में समय के लिए विशेष स्वास्थ्य रणनीति तैयार की है। इसका मुख्य लक्ष्य देश के 75 ग्रामीण ब्लॉकों तक पहुंच बनाते हुए 25 लाख आबादी को फायदा पहुंचाना है। इस पूरी योजना का मुख्य फोकस देश की 100 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं एवं इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूत करना है। नोयल टाटा ने जानकारी दी कि गंभीर मेडिकल इमरजेंसी से जूझ रहे परिवारों को ट्रस्ट मदद देता रहेगा। देशभर में कैंसर केयर नेटवर्क का और ज्यादा विस्तार किया जाएगा, जिससे मरीजों को बड़े शहरों के चक्कर न काटने पड़े एवं उन्हें उनके घर के पास बेहतर इलाज मिल सके।
प्रतिभाशाली युवाओं के देश छोड़ने पर चिंता
देश से टैलेंट के पलायन पर गहरी चिंता जताते हुए नोयल टाटा ने कहा, हमारे देश के होनहार युवा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जा रहे, क्योंकि उन्हें अपने देश में वैसी सुविधाएं या मौके नहीं मिल पाते। भारत को अपने ऐसे प्रतिभाशाली दिमागों को यहीं रोकने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए एवं अधिक विश्वस्तरीय संस्थानों की जरूरत है। बता दें, टाटा ट्रस्ट्स ने इतिहास में राष्ट्रीय महत्व के कई बड़े संस्थानों (जैसे-आईआईएससी, टीआईएफआर और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल) को शुरू करने और संवारने में अहम भूमिका निभाई है।