बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग मामले में पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी है। मामले की गहराई से जांच कर रही पुलिस टीम ने हमलावरों तक हथियार पहुँचाने वाले पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों तक पिस्टल और कारतूस पहुंचाने के लिए एक खास तरीका अपनाया गया था। इसमें अमृतसर में हथियारों को एक गुप्त जगह पर छोड़ा गया और फिर उन्हें वहां से उठाकर मुंबई पहुंचाया गया। इस पूरे मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। जांच में आरोप लगा है कि टाइगर श्रॉफ पर हमला करने वाले बदमाशों तक हथियार पहुँचाने में दो युवतियों ने भी उनकी मदद की थी।
क्या है 'डेड लेटर बॉक्स' का तरीका?
जांच में सामने आया है कि हथियारों की सप्लाई के लिए 'डेड लेटर बॉक्स' नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसमें सामान को किसी तयशुदा गुप्त स्थान पर रख दिया जाता है, जहां से दूसरा व्यक्ति उसे उठा लेता है। इस तरह सामान पहुंचाने वाले और उसे लेने वाले के बीच सीधे मुलाकात नहीं होती। पुलिस के अनुसार, कुणाल और सुमित करीब दो सप्ताह पहले अमृतसर गए थे। वहां उन्हें एक तय जगह से पिस्टल और कारतूस लेने थे। यह लोकेशन उन्हें अनिल पंडित के जरिए मिली थी, जो कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के माध्यम से कुणाल के संपर्क में था।
गर्लफ्रेंड और उसकी सहेली को सौंपी हथियार पहुंचाने की जिम्मेदारी
पुलिस की जांच के मुताबिक, अमृतसर से हथियार हासिल करने के बाद उन्हें मुंबई पहुंचाने के लिए कुणाल ने अपनी गर्लफ्रेंड राधा और उसकी सहेली बबीता की मदद ली। दोनों युवतियां हरियाणा के सोनीपत में काम करती थीं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि 15 अक्टूबर को दोनों को दिल्ली से मुंबई जाने वाली ट्रेन में बैठाया गया। उनके पास मौजूद बैग में पिस्टल और कारतूस थे। 17 अक्टूबर को मुंबई पहुंचने के बाद वे दादर इलाके में एक होटल में ठहरीं। पुलिस के अनुसार, इसके बाद एक लड़का होटल के पास राधा से बैग लेकर चला गया। अगले दिन, 18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई।
हथियार पहुंचाने के बदले मिली थी रकम
पुलिस के मुताबिक, इस काम के लिए कुणाल और सुमित को करीब 70 से 80 हजार रुपये दिए गए थे। इसमें से 10 से 12 हजार रुपये राधा और बबीता को देने की बात सामने आई है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस नेटवर्क के जरिए हथियारों को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी, ताकि पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान छिपी रहे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों की सप्लाई का आदेश किसने दिया था और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।
फायरिंग मामले में कई गिरफ्तारियां
मुंबई के जुहू इलाके में 18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलाई गई थीं। अभिनेता इस घटना में सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर और पास में मौजूद एक व्लॉगर को गोली लगने से चोटें आईं। इस मामले में पुलिस ने कथित हमलावरों के साथ हथियारों की सप्लाई से जुड़े लोगों को भी गिरफ्तार किया है। जांच में दिल्ली, सोनीपत, अमृतसर और मुंबई के बीच कड़ियां सामने आई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फायरिंग की साजिश किस स्तर पर तैयार हुई और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी। फिलहाल, मामले में सामने आए आरोपों की जांच जारी है। पुलिस की अगली कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि पूछताछ और अन्य सबूतों से हथियारों की सप्लाई करने वाले नेटवर्क के बारे में और क्या जानकारी मिलती है।