Mobile Phone On Speaker In Train : आप भी ट्रेन या रेलवे स्टेशन पर बिना ईयरफोन लगाए मोबाइल स्पीकर पर गाने बजाने, वीडियो देखने या तेज आवाज में रील्स चलाने के शौकीन हैं तो यह आदत तुरंत बदल लीजिए। रेलवे प्रशासन अब ऐसे यात्रियों को लेकर बेहद सख्त हो गया है। दक्षिण रेलवे के मुताबिक ट्रेन में तेज आवाज में मोबाइल चलाने से दूसरे यात्रियों को तकलीफ होती है तो आपको 6 महीने तक की जेल और 5000 रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर इन दिनों मोबाइल पर इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। कई यात्री बिना संकोच ट्रेन के डिब्बों में ऊंची आवाज में गाने सुनते हैं, फिल्में देखते हैं या वीडियो कॉलिंग करते हैं। दक्षिण रेलवे के चेन्नई मुख्यालय से जारी पत्र में कहा गया है कि इस तरह की हरकतों से सहयात्रियों को भारी असुविधा होती है। खासकर उनको जो लंबी यात्रा के दौरान आराम करना चाहते हैं। रात के समय भी कई लापरवाह यात्री स्पीकर ऑन करके रील्स देखते रहते हैं, जिससे पूरे कोच की शांति भंग होती है।

पुराने नियमों की याद और जन विश्वास कानून का शिकंजा

नया आदेश अचानक नहीं आया है। रेलवे बोर्ड ने 23 जुलाई 2012 को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। उनमें मोबाइल पर तेज रिंगटोन, लंबी बातचीत और स्पीकर पर गाने सुनने से बचने की सलाह दी गई थी। विशेष तौर पर एसी कोच में इससे अन्य यात्रियों को काफी डिस्टर्बेंस होती है। अब जन विश्वास कानून के तहत संशोधित रेलवे एक्ट की धारा-145 का हवाला देते हुए रेलवे ने इसे और ज्यादा कड़ा कर दिया है। इसके तहत रेलवे परिसर या ट्रेन के अंदर किसी भी तरह का उपद्रव, अनावश्यक शोर-शराबा या यात्रियों को परेशान करने वाली हरकतों पर सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा।

जानिए जुर्माने और सजा के नियम

पहली बार या सामान्य चेतावनी : कोई यात्री समझाने के बावजूद नहीं मानता है तो रेलवे कर्मचारी या अधिकृत स्टाफ (जो टिकट परीक्षक यानी टीटीई या उससे ऊपर के पद का हो) उसे वहां से हटा सकता है, उसका टिकट या पास जब्त कर सकता है और 1000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है।

बार-बार नियम तोड़ने पर : रेलवे कर्मी के वैध निर्देशों के बाद भी कोई यात्री अपनी हरकत बंद नहीं करता और लगातार उपद्रव जारी रखता है तो उसे 6 महीने तक की साधारण कैद या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या फिर ये दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं।

रेलवे की तरफ से क्या उठाए जा रहे कदम?

लाउडस्पीकर एनाउंसमेंट : अब ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर पब्लिक एड्रेस (PA) सिस्टम के जरिए हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय क्षेत्रीय भाषाओं में लगातार घोषणाएं की जाएंगी।

यात्रियों से अपील : यात्रियों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे वीडियो या गाने सुनने के लिए केवल ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करें।

सूचना बोर्ड : बोगी और प्लेटफॉर्म्स पर जागरूकता के लिए नोटिस व सूचना-पट्ट लगाए जा रहे, ताकि नियमों का कड़ाई से पालन हो सके।

सहयात्रियों के प्रति जिम्मेदारी और डिजिटल शिष्टाचार

डिजिटल शिष्टाचार सार्वजनिक परिवहन जैसे ट्रेन या बस में सफर करते समय अपनी पर्सनल पसंद को दूसरों पर थोपना कानूनी जुर्म के साथ सामाजिक रूप से भी गलत है। हमेशा ध्यान रखें कि आपकी मस्ती किसी दूसरे थके-हारे यात्री की नींद में खलल न डाले।

हेल्पलाइन नंबर : आपके आसपास कोई यात्री लगातार तेज आवाज में मोबाइल चला रहा है और मना करने पर झगड़ा कर रहा है तो आप तुरंत रेल मदद ऐप या रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद आरपीएफ या टीटीई तुरंत एक्शन लेंगे।