उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर मतदान के दौरान मतदाता सूची में मिली गंभीर खामियों पर चुनाव आयोग ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। कुछ मतदाताओं और उनके पिता के नाम ऐसे दर्ज मिले, जिनका सामान्य नामों से कोई मेल नहीं था। मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने कहा कि शुरुआती जांच में 158 रिकॉर्ड में नाम या पारिवारिक विवरण से जुड़ी गड़बड़ियां पाई गई हैं। अधिकारियों को इन गलतियों की वजह पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं। 

कहीं नाम बना ‘राम ने यादव को मारा’, कहीं पिता का नाम ‘बीकॉम’

मतदाता सूची में दर्ज कुछ प्रविष्टियों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मतदाता के पिता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज मिला, जबकि एक अन्य रिकॉर्ड में पिता के नाम की जगह ‘बीकॉम’ लिखा हुआ था। इसी तरह कुछ मतदाता पर्चियों में ‘टक्कर मारना’ और ‘मूर्ख काली देवी’ जैसे नाम भी सामने आए। इन गड़बड़ियों की जानकारी सामने आने के बाद राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। खासतौर पर इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सूची को लेकर शिकायतें की गईं। 

सॉफ्टवेयर और मानवीय लापरवाही को बताया वजह

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के मुताबिक, मतदाता सूची तैयार करने के दौरान तकनीकी खामियों और मानवीय लापरवाही के कारण इस तरह की गलतियां हुईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कुछ नामों को अंग्रेजी से हिंदी में बदलते समय सॉफ्टवेयर ने नाम का लिप्यंतरण करने के बजाय उसके अर्थ का अनुवाद कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की गई थी। अधिकारियों से यह पता लगाने को कहा गया है कि गलतियां आवेदन भरने, डेटा दर्ज करने या सूची की जांच के दौरान किस चरण में हुईं। 

14.81 लाख मतदाताओं में 158 रिकॉर्ड प्रभावित

निर्वाचन विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में कुल 14,81,310 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 158 रिकॉर्ड में नाम या परिजनों के विवरण से संबंधित त्रुटियां सामने आई हैं। आयोग ने कहा कि प्रभावित प्रविष्टियों की संख्या कुल मतदाताओं की तुलना में बहुत कम है, लेकिन गलतियों की वजह का पता लगाना जरूरी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, नई डिजिटल प्रणाली के जरिए मतदाता पंजीकरण, आवेदनों की स्वीकृति या अस्वीकृति, दोहरी प्रविष्टियों की जांच और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी की गई। हालांकि, असामान्य नाम अंतिम सूची में कैसे शामिल हो गए, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। 

गड़बड़ी के बावजूद पात्र मतदाता वोट डाल सकेंगे

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल नाम की वर्तनी या प्रिंटिंग में मामूली गलती होने के कारण किसी पात्र मतदाता को मतदान से वंचित नहीं किया जाएगा। मतदान केंद्र पर मौजूद अधिकारी को संबंधित व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करनी होगी। पहचान संतोषजनक पाए जाने पर मतदाता को नियमानुसार वोट डालने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों और मतदान कर्मियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं, ताकि मतदाता सूची में त्रुटियों के कारण किसी को अनावश्यक परेशानी न हो।

राजनीतिक दलों ने भी उठाए सवाल

मतदाता सूची की गलतियों को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी, दोनों की ओर से अलग-अलग शिकायतें सामने आई हैं। विपक्ष ने सूची की शुद्धता पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ मामलों में डुप्लीकेट प्रविष्टियों को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। अब निर्वाचन विभाग की जांच में यह पता लगाने पर जोर है कि गलत नामों की प्रविष्टियां किस प्रक्रिया के तहत हुईं और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जानी चाहिए। आयोग का कहना है कि मतदान के दौरान पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना प्राथमिकता है।