Marco Rubio On India Protests : अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आज भारत निर्वाचन आयोग के विरोध में प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के बयान को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह भारत का पूरी तरह से अंदरूनी राजनीतिक मामला है और इस पर कोई भी फैसला करने का हक सिर्फ भारत के लोगों को ही है।

यूएन एक्सपर्ट्स शब्द पर कसा तंज

भारत में विपक्षी पार्टियों और छात्रों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर जब यूएन विशेषज्ञों की टिप्पणी पर सवाल पूछा गया, तो रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत के आंतरिक मामलों में कोई दखलअंदाजी नहीं करेगा। रूबियो ने चुटकी लेते हुए कहा कि यूएन एक्सपर्ट्स शब्द ही अपने आप में एक विरोधाभास है। उन्होंने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत मजबूत और जीवंत लोकतंत्र है, जहां नियमित रूप से चुनाव होते हैं। इसलिए वे भारत के किसी भी अंदरूनी या राजनीतिक मसले पर अपनी राय नहीं देंगे।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा में फर्क समझाया

अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपनी बात में शांतिपूर्ण तरीकों से विरोध जताने और हिंसा फैलाने के बीच का अंतर भी साफ किया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं को जाहिर करने की आजादी होना अच्छी बात है। यूरोप में हुए हिंसक प्रदर्शनों की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि वे उन दंगों का समर्थन बिल्कुल नहीं कर रहे, जिनमें सरकारी या निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जाता है या इमारतों में आग लगा दी जाती है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का करारा जवाब

इससे पहले यूएन के कुछ विशेषज्ञों ने दावा किया था कि भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर रोक लगाई जा रही है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा ताकत इस्तेमाल हो रही और लोग लापता हो रहे हैं।

भारत की कड़ी आपत्ति

भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इन आरोपों कोसिरे से नकार दिया। भारतीय राजनयिक बरखा ताम्रकार ने कहा कि बिना ठोस सबूत और आधे-अधूरे आंकड़ों के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बदनाम करने की कोशिशों का भारत विरोध करता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद-21 हर नागरिक के मानवाधिकारों की गारंटी देता है। भारत ने साफ किया कि मानवाधिकारों के नाम पर किसी खास देश को निशाना बनाने या राजनीतिक दबाव बनाने का खेल बंद होना चाहिए और इस विषय पर सिर्फ निष्पक्ष और सबूतों के आधार पर ही बात होनी चाहिए।