SIR Latest Hindi News : आगामी विधानसभा चुनावों से पहले 5 प्रमुख राज्यों-उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा-की मतदाता सूची में बड़ा फेरबदल दिखा है। निर्वाचन आयोग और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। विशेष पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत से पहले इन पांचों राज्यों को मिलाकर कुल 18.71 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। वैसे, अंतिम सूची जारी होने के बाद यह आंकड़ा सिमटकर 16.43 करोड़ पर आ गया है। मतलब 2.29 करोड़ मतदाताओं (यानी 12.2%) के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।
राज्यवार आंकड़े : कहां-कितना असर पड़ा?
1. उत्तर प्रदेश (UP) : सबसे बड़ा झटका
- शुरुआती मतदाता : 15.44 करोड़।
- ड्राफ्ट सूची : घटकर 12.56 करोड़।
- अंतिम सूची : 84 लाख नाम फिर जुड़ने के बाद संख्या 13.40 करोड़ हुई।
- कुल कमी : 2.04 करोड़ (13.24%) मतदाता कम हुए।
विशेष नोट: पांचों राज्यों में हुई कुल कटौती का लगभग 90 फीसदी हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से है।
2. पंजाब
- शुरुआती मतदाता : 2.15 करोड़।
- ड्राफ्ट सूची : 1.94 करोड़।
- अंतिम सूची : 7 लाख नाम वापस जुड़ने से 2.01 करोड़ हुई
- कुल कमी : 14 लाख (6.34%) मतदाता घटे।
- पुनर्बहाली : ड्राफ्ट से हटाए गए 21 लाख नामों में से लगभग 34% नाम दोबारा शामिल कर लिए गए।
3. उत्तराखंड
- शुरुआती मतदाता : 80 लाख।
- ड्राफ्ट सूची : 71 लाख।
- अंतिम सूची : 72 लाख।
- कुल कमी : 8 लाख (10.07%) मतदाता कम हुए।
- पुनर्बहाली : हटाए गए नामों में से केवल 3% की ही वापसी हो सकी।
4. मणिपुर
- शुरुआती मतदाता : 20.9 लाख
- ड्राफ्ट सूची : 19.3 लाख
- अंतिम सूची : 19.6 लाख
- कुल कमी : 1.3 लाख (6.33%) मतदाता घटे।
- पुनर्बहाली : हटाए गए नामों में से करीब 17% नाम वापस जोड़े गए।
5. गोवा: अकेला राज्य जहां अंतिम सूची में और घटे नाम
- शुरुआती मतदाता : 11.85 लाख।
- ड्राफ्ट सूची : 10.85 लाख।
- अंतिम सूची : और घटकर 10.58 लाख रह गई।
- कुल कमी : 1.3 लाख (10.76%)
विशेष नोट : गोवा इकलौता ऐसा राज्य रहा, जहां ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में संख्या और कम हो गई तथा हटाए गए नामों की कोई वापसी दर्ज नहीं हुई।
कटौती का कारण और मतदाताओं के लिए मौका
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट और पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। किसी वैध नागरिक का नाम गलती से सूची से हट गया है तो उसे अपना नाम फिर से जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। इसके अलावा जो युवा 1 जनवरी तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे भी नए वोटर के रूप में अपना पंजीकरण कराकर मतदान प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं।
विधानसभाओं का कार्यकाल और चुनावी तैयारियां
इन पांचों राज्यों में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई को समाप्त हो रहा। पंजाब (117 सीटें), उत्तराखंड (70 सीटें), मणिपुर (60 सीटें) और गोवा (40 सीटें) की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तिथियों पर समाप्त होगा।
समय से पहले चुनाव का नियम
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के प्रावधानों के अनुसार भारत निर्वाचन आयोग को यह अधिकार प्राप्त है कि वह विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से 6 महीने पहले भी चुनाव आयोजित करा सकता है। चुनाव आयोग ने इन राज्यों में तैयारियाँ तेज कर दी हैं। अधिकारियों के दल लगातार राज्यों का दौरा कर समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। इसी क्रम में अक्टूबर के दौरान मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड में चुनावी तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठकें पूरी की जा चुकी हैं। इनमें कानून-व्यवस्था और मतदान केंद्रों की व्यवस्था जैसे विविध पहलुओं का जायजा लिया गया।