Ghaziabad Police Post Blast News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिला अंतर्गत इंदिरापुरम थाना क्षेत्र स्थित वसुंधरा पुलिस चौकी के भीतर हुए जोरदार धमाके को लेकर बहुत बड़ा खुलासा सामने आया है। तहरीक-उल-मुजाहिदीन-ए-हिंदुस्तान ने सोशल मीडिया पर हमले की जिम्मेदारी ली है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गाजी 2 नाम के एक अकाउंट से जारी पोस्ट और वीडियो में दावा किया गया है कि तथाकथित भगवा हुकूमत के खिलाफ पुलिस को निशाना बनाया गया है। आतंकी संगठन के इस तरह के बड़े दावे के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस, यूपी एटीएस (ATS), फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (FSL), बम निरोधक दस्ता एवं तमाम खुफिया एजेंसियां गहराई से जांच में जुट गई हैं।
व्यस्त और संवेदनशील इलाका
जहां यह धमाका हुआ है, वह इलाका गाजियाबाद का बेहद व्यस्त तथा संवेदनशील है। वसुंधरा पुलिस चौकी के दोनों तरफ मुख्य सड़कें हैं, जो इंदिरापुरम और गाजियाबाद को आपस में जोड़ती हैं। इसके बिल्कुल पास से दिल्ली से राजनगर की तरफ जाने वाला प्रमुख एलिवेटेड रोड भी गुजरता है। ऐसे में हर समय भारी आवाजाही वाले इस क्षेत्र में स्थित पुलिस चौकी के भीतर ऐसी घटना होना सीधे तौर पर सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
कल रात 10 बजे हुआ था धमाका
यह धमाका कल देर रात 10 बजे हुआ था। तीव्रता इतनी अधिक थी कि पुलिस चौकी के एसी पूरी तरह उड़ गए। खिड़कियां टूटकर बिखर गए। दीवारों में गहरी दरारें आ गईं। गनीमत रही कि घटना के वक्त चौकी में कोई पुलिसकर्मी नहीं था। इससे बड़ा हादसा टल गया। वैसे, इस ब्लास्ट की चपेट में आकर चौकी के पास से गुजर रहा अर्थला का रहने वाला 20 वर्षीय फूड डिलीवरी एजेंट विशाल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे दिल्ली के सूर्य नगर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया।
क्या वाकई कोई नया संगठन है या पुराना कनेक्शन?
इस ब्लास्ट के बाद जिस तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान संगठन ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी ली है, उसे लेकर सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह नया या अप्रत्याशित नाम लग रहा, क्योंकि इससे पहले इस विशिष्ट नाम वाले किसी संगठन की कोई जानकारी सामने नहीं आई थी। सूत्रों का कहना है कि तहरीक-उल-मुजाहिदीन (TuM) नाम के एक संगठन को गृह मंत्रालय द्वारा साल 2019 में आतंकी संगठन घोषित कर बैन किया गया था, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से चलाया जाता था। अब एजेंसियां इस तकनीकी पहलू की भी बारीकी से जांच कर रहीं कि क्या यह नया दिखने वाला तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान संगठन उसी बैन संगठन का कोई नया बदला हुआ रूप या फ्रंट विंग है।
ISI की गहरी साजिश और शहजाद भट्टी का एंगल
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को इस घटना के पीछे सीमा पार बैठे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की किसी गहरी और खतरनाक साजिश की भी आशंका है। जानकारों का मानना है कि ISI भारत में अशांति फैलाने और सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए स्थानीय स्लीपर सेल या नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकती है और ऐसे ही किसी नए या भ्रामक नामों का पाखंड रच सकती है। इसके पीछे कुख्यात ऑपरेटर्स जैसे शहजाद भट्टी जैसे चेहरों की संलिप्तता की भी अंदरखाने सुगबुगाहट है। वैसे, गाजियाबाद पुलिस और साइबर सेल वायरल हो रहे उस एक्स पोस्ट, ऑडियो-वीडियो संदेश के डिजिटल फुटप्रिंट्स और प्रामाणिकता की तकनीकी जांच कर रही। पुलिस अधिकारियों का यह भी कहना है कि यह किसी सिरफिरे शरारती तत्व द्वारा सनसनी फैलाने के इरादे से किया गया फर्जी दावा भी हो सकता है। फॉरेंसिक साक्ष्यों और तकनीकी सर्विलांस की रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।