Yogi Adityanath News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 5वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए पूर्व के माफियाराज पर कड़ा प्रहार किया और देश की न्याय व्यवस्था, कानून के शासन तथा अपने संबोधन में अहम बातें साझा कीं। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के अगले होने वाले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विक्रमनाथ, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली और प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
माफियाओं के राज पर सीएम योगी का तीखा बयान
मुख्यमंत्री ने अतीत का जिक्र किया और कहा कि प्रयागराज में ऐसा माफिया हुआ करता था, जिस पर राज्य का कोई कानून लागू नहीं होता था। उस दौर में न तो मुख्यमंत्री की कोई हैसियत मायने रखती थी, न गवर्नर की और न किसी जज की कोई परवाह की जाती थी। हालात यह थे कि जब उसका काफिला सड़क से गुजरता था तो बाकी सब रोककर सबसे पहले उसका काफिला पास कराया जाता था। वह जिस जमीन पर पैर रख देता था, वह रातों-रात उसकी हो जाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में रूल ऑफ माफिया यानी अपराधियों का कानून चलता था, लेकिन उनकी सरकार ने उसे कानून की किताब से पूरी तरह बाहर निकालकर बहुत ईमानदारी के साथ रूल ऑफ लॉ (कानून का शासन) को स्थापित किया है।
जस्टिस विक्रमनाथ का हल्के-फुल्के अंदाज में भाषण
सुप्रीम कोर्ट के होने वाले अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विक्रमनाथ ने दिलचस्प वाकया सुनाया। उन्होंने बड़े मजाकिया अंदाज में कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने उन्हें बिना कागज या भाषण को पढ़े बोलने की सलाह दी थी, लेकिन यूनिवर्सिटी के कुलपति ने उन्हें लिखित भाषण पढ़ने के लिए कहा है। इस पर जस्टिस विक्रमनाथ ने चुटकी लेते हुए कहा कि इस बार वे कुलपति की बात मान लेते हैं, लेकिन अगली बार जब वे यहां आएंगे तो मुख्यमंत्री की बात मानकर बिना कोई कागज देखे भाषण देंगे।
मेधावी छात्रों को मिलीं डिग्रियां और मेडल
समारोह में 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उनकी डिग्रियां और उपाधियां दी गईं। 17 मेधावी छात्रों को मेडल दिया गया। इनमें 11 गोल्ड मेडल, 5 सिल्वर मेडल और 4 ब्रॉन्ज मेडल हैं। खास बात रही कि गोल्ड मेडल हासिल करने वालों में 8 छात्राएं और 3 छात्र शामिल रहे।
योगी आदित्यनाथ के भाषण की प्रमुख बातें
वकीलों के लिए सत्य और धर्म का पाठ
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर अधिवक्ता के लिए हमेशा सच बोलना, अपने धर्म का पालन करना और जीवनभर निरंतर अध्ययन करते रहना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कुलपति के भाषण की शुरुआत में बोले गए संस्कृत श्लोक सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमद। का गहरा अर्थ समझाते हुए इसे वकीलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बताया।
जस्टिस एचआर खन्ना के ऐतिहासिक फैसले का जिक्र
इमरजेंसी का जिक्र कर योगी आदित्यनाथ ने सर्वोच्च अदालत के जस्टिस एचआर खन्ना के असहमति वाले फैसले को याद करते हुए कहा, भले इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी हो, लेकिन इतिहास अब भी उनकी उस न्यायसंगत असहमति को भूला नहीं है। इस मिसाल के जरिए उन्होंने समझाया कि कैसे रूल ऑफ लॉ और शासक की मर्जी से चलने वाले कानून में जमीन-आसमान का फर्क होता है।
विद्यार्थियों से राम, कृष्ण और शिव के आदर्श अपनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने छात्रों-छात्राओं से कहा कि उन्हें भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और शिव के गुणों को अपनाना चाहिए। डॉ. राम मनोहर लोहिया ने शिव जैसा उच्च मस्तिष्क, कृष्ण जैसा संवेदनशील हृदय और राम जैसी अटूट मर्यादा को भारत के तीन सबसे बड़े आदर्श माना था। युवाओं को कठिन और विकट परिस्थितियों में शिव से फैसले लेना, गरीबों और असहायों के प्रति कृष्ण जैसी करुणा रखना और राम से अपनी मर्यादाओं का पालन करना सीखना चाहिए।
साल 2014 के बाद देश में आए राजनीतिक और आर्थिक सुधार
सीएम ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में न्याय व्यवस्था की बहुत बड़ी भूमिका है। किसी केस को जीतने की तरह देश की जनता का भरोसा जीतना भी सरकार के लिए उतना ही अहम है। उन्होंने याद दिलाया कि 30 लंबे साल के इंतजार के बाद 16 मई 2014 को देश में किसी एक राजनीतिक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला। नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, जिसके बाद देश में सुधारों की रफ्तार तेज हुई।
1500 से अधिक पुराने व बेकार कानून किए समापत
सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए योगी आदित्यनाथ ने बताया कि देशहित में 1500 से अधिक पुराने और आज के समय में गैर-जरूरी हो चुके कानूनों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। जन विश्वास अधिनियम के तहत 42 कानूनों के 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर निकाला गया ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। इसके अलावा देश में दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता लाई गई, वन नेशन-वन टैक्स के तहत GST लागू किया गया, जम्मू-कश्मीर से धारा-370 को हटाया गया और ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुधार का मतलब केवल नए कानून थोपना नहीं है, बल्कि समय के साथ अनुपयोगी हो चुके पुराने कानूनों को हटाना भी होता है।