Yogi Adityanath Latest Statement : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की तरफ से मिली अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती का कड़ा पलटवार करते हुए उसे खुले तौर पर स्वीकार कर लिया है। बलरामपुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने अखिलेश को सीधी चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह भी अयोध्या से अपना नामांकन दाखिल करके मैदान में उतरें। इस दौरान उन्होंने माफियाराज, राम मंदिर निर्माण और विपक्षी दलों की भाषा शैली पर भी तीखे प्रहार किए। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश यादव के बयानों और दौरों को लेकर कड़े सवाल खड़े किए हैं।

अयोध्या सीट से चुनाव लड़कर ताकत दिखाएं: अखिलेश

बता दें, अखिलेश यादव हाल में दो दिनों के दौरे पर अयोध्या पहुंचे थे, जहां उन्होंने एक भागवत कथा में हिस्सा लेने के साथ-साथ स्थानीय संतों से मुलाकात का आशीर्वाद लिया और एक जनसभा में भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश ने चुनौती देते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री को अपनी लोकप्रियता पर इतना ही भरोसा है तो वे अगली बार अयोध्या सीट से चुनाव लड़कर अपनी ताकत दिखाएं। उन्होंने चुनाव आयोग और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवालिया निशान खड़े किए थे। सपा प्रमुख का यह भी कहना था कि शासन न्याय और इंसानियत के बल पर चलता है और आगामी चुनाव में अयोध्या की जनता दूध का दूध और पानी का पानी अलग कर देगी।

आइए! एक बार अपनी-अपनी किस्मत आजमाते हैं: योगी

इसी बात का करारा जवाब देते हुए सीएम योगी ने बलरामपुर में कहा कि अयोध्या हमारे लिए सियासत का मैदान नहीं बल्कि पावन धाम और आस्था की बड़ी स्थली है। उन्होंने कहा है कि अखिलेश जी, मैं अयोध्या राजनीति करने नहीं, बल्कि विकास के उद्देश्यों से जाता हूं। मैं आपको एक ऑफर देता हूं कि आप भी अयोध्या से चुनाव के लिए पर्चा भरें और मैं भी मैदान में उतरता हूं, आइए एक बार अपनी-अपनी किस्मत आजमा लेते हैं।

पुरानी सरकारों के कार्यकाल को दिलाया याद

सीएम योगी ने पुरानी सरकारों के कार्यकाल को याद करते हुए विपक्ष पर पुराने जख्मों को कुरेदा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की सरकारों के दौर में दुर्दांत माफिया जिस जमीन पर कदम रख देते थे, उस पर अवैध कब्जा जमा लेते थे। सपा शासनकाल के गुंडे-बदमाश व्यापारियों को फोन पर धमकियां देकर उनकी संपत्ति हड़प लिया करते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2017 से पहले बलरामपुर की सड़कें बदहाली के सबसे बुरे दौर में थीं। अब राज्य में वसूली, तस्करी और अपराधियों की अराजकता का दौर खत्म हो चुका है और उसकी जगह विकास ने ले ली है, जिसके तहत इस पिछड़े क्षेत्र को संभावनाओं से भरे जिले में बदला जा रहा है।

विरोध की भी मर्यादा होनी चाहिए: सीएम

मुख्यमंत्री ने राम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने इन पवित्र धामों के निर्माण में हरसंभव रोड़े अटकाए थे, वे आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने में लगे हैं, लेकिन विरोध की भी एक तय मर्यादा होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर सियासी शिष्टाचार भूलकर बेहद अभद्र और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया। उनके मुताबिक इस तरह के निचले स्तर के प्रयास जनता को भटकाने और समाज में अराजकता फैलाने वाले हैं।

श्रीराम के मंदिर में दर्शन नहीं करने पहुंचे अखिलेश

इससे पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर तीखा तंज कसते हुए कहा था कि वे भागवत कथा में तो शामिल होने गए, लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर में दर्शन करने नहीं पहुंचे। मौर्य के अनुसार जो लोग रामलला के दरबार में हाजिरी लगाने से बचते हैं, उनकी तथाकथित रामभक्ति पर जनता सवालिया निशान खड़े कर रही है, जबकि देश और दुनियाभर से करोड़ों लोग मंदिर में लगातार दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

अखिलेश ने किए थे कई बड़े सियासी वादे

गौरतलब है कि अयोध्या में अपने दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने कई बड़े सियासी वादे भी किए थे। उन्होंने घोषणा की थी कि अगर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।