Congress PCC Chief Change Election Strategy : आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी ने पंजाब, उत्तर प्रदेश और गोवा में संगठन की कमान नए चेहरों को सौंप दी है। पंजाब में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाकर परगट सिंह को जिम्मेदारी दी गई। यूपी में अजय राय के स्थान पर आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। गोवा में अमित पाटकर की जगह गिरीश चोडनकर को पार्टी की बागडोर सौंपी गई है। ऐन चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष बदलने की कांग्रेस की यह रणनीति नई नहीं है। पार्टी इससे पहले भी कई राज्यों में यह प्रयोग कर चुकी है।

चुनाव से ठीक पहले कमान बदलने का गणित क्या है?

किसी भी राज्य में प्रदेश अध्यक्ष संगठन की सबसे मजबूत कड़ी होता है। जब चुनाव करीब होते हैं तो पार्टी अक्सर संगठन में नई ऊर्जा भरने, आपसी गुटबाज़ी को शांत करने और अलग-अलग जातियों एवं क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने के लिए यह कदम उठाती है। मकसद होता है कि नए नेतृत्व के साथ चुनावी मैदान में उतरा जाए।

क्या पूर्व में सफल रहा है यह दांव?

चुनाव से ठीक पहले अध्यक्ष बदलने का यह फैसला कांग्रेस के लिए मिला-जुला साबित हुआ है। कुछ राज्यों में इससे बंपर फायदा मिला तो कुछ जगह यह दांव उलटा भी पड़ा।

हिमाचल प्रदेश (2022) : चुनाव से कुछ समय पहले पार्टी हाईकमान ने कमान प्रतिभा सिंह के हाथों में सौंपी थी। नतीजा हुआ कि कांग्रेस ने 68 में से 40 सीटें जीतकर राज्य में सरकार बना ली।

झारखंड (2024) : चुनाव से तीन महीने पहले राजेश ठाकुर को हटाकर केशव महतो कमलेश को जिम्मेदारी दी गई। यहां कांग्रेस 16 सीटें बचाने में कामयाब रही और जेएमएम के साथ मिलकर दोबारा सरकार बनाई।

यहां पूरी तरह फ्लॉप रहा फॉर्मूला

बिहार (2025) : चुनाव से सात महीने पहले अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह राजेश कुमार को नया अध्यक्ष बनाया गया। वैसे, यह बदलाव बेअसर साबित हुआ और पार्टी 19 सीटों से घटकर केवल 6 सीटों पर सिमट गई।

छत्तीसगढ़ (2023) : चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी ने मोहन मरकाम को हटाकर दीपक बैज को कमान सौंपी। इसके बावजूद पार्टी सत्ता से बाहर हो गई और सीटों की संख्या 68 से घटकर 35 पर आ गई।

पंजाब, यूपी और गोवा में क्या दांव चला?

पंजाब में बढ़ रही अंदरूनी गुटबाज़ी पर लगाम कसने के लिए राजा वड़िंग की जगह परगट सिंह को लाया गया है। उत्तर प्रदेश में आराधना मिश्रा मोना को कमान सौंपकर पार्टी ने महिला और ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। साथ ही इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर मुस्लिम वोटबैंक को जोड़े रखने का संदेश दिया गया है। गोवा में भी पार्टी ने मई में अमित पाटकर की जगह गिरीश चोडणकर पर भरोसा जताया है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या ऐन वक्त पर संगठन में किया गया यह बड़ा फेरबदल कांग्रेस को जीत का स्वाद चखा पाएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा? इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजे ही तय करेंगे।