दरभंगा स्थित बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस बल (बीएसएपी)-13 परिसर में बुधवार को मॉक ड्रिल के दौरान टियर गैस के असर से बड़ी संख्या में प्रशिक्षु जवानों की तबीयत बिगड़ गई। करीब 122 जवानों को इलाज के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) की इमरजेंसी में लाया गया। इनमें कई जवानों को उल्टी, बेचैनी और चक्कर जैसी शिकायतें हुईं। उपचार के बाद 117 जवानों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि पांच को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया।
मॉक ड्रिल के दौरान फैला टियर गैस का असर
जानकारी के मुताबिक, बीएसएपी-13 परिसर में वरिष्ठ अधिकारियों के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही थी। इसी दौरान टियर गैस का इस्तेमाल किया गया। आसपास मौजूद कुछ प्रशिक्षु महिला और पुरुष जवान भी इसकी चपेट में आ गए। रिपोर्ट के अनुसार, जवानों ने गैस के प्रभाव के बाद अचानक उल्टी, जी मिचलाने और बेचैनी की शिकायत की। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए डीएमसीएच भेजा गया।
पांच जवान डॉक्टरों की निगरानी में
जवानों के अस्पताल पहुंचने के बाद डीएमसीएच प्रशासन ने चिकित्सकों को अलर्ट किया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के एक साथ पहुंचने से इमरजेंसी विभाग में अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। करीब तीन घंटे के उपचार के बाद 117 जवानों को छुट्टी दे दी गई। पांच जवानों को फिलहाल निगरानी में रखा गया है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है।
भोजन को लेकर भी उठी थी आशंका
शुरुआत में कुछ जवानों के बीमार पड़ने के बाद भोजन से जुड़ी समस्या यानी फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई थी। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि जवानों ने दोपहर के भोजन में चावल, दाल, रोटी और मशरूम की सब्जी खाई थी। हालांकि, बीएसएपी-13 के कमांडेंट ने बाद में जवानों की तबीयत बिगड़ने का कारण मॉक ड्रिल के दौरान इस्तेमाल हुई टियर गैस के धुएं को बताया। डीएमसीएच के स्तर पर भी पॉयजनिंग की आशंका की बात सामने आई थी। ऐसे में घटना के वास्तविक कारण को लेकर जांच की स्थिति महत्वपूर्ण है। भारी संख्या में सुरक्षा बलों के जवानों के एक साथ डीएमसीएच (DMCH) पहुँचने के कारण अस्पताल के आपातकालीन वार्ड (इमरजेंसी) में भगदड़ और गहमागहमी का माहौल पैदा हो गया। जवानों को कई एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुँचाया गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और चिकित्सा प्रशासन के बड़े अधिकारी भी तुरंत मौके पर पहुँचे और मरीजों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया।