Protest Against CEC Gyanesh Kumar On Jantar Mantar : विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारी राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। आज जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करने पहुंचे आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा, कुछ और नेताओं-कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जंतर-मंतर पर विरोध की अपील आईसा (AISA), आरजेडी सांसद और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की ओर से संयुक्त रूप से की गई थी।

सेंट्रल दिल्ली छावनी में तब्दील, 12 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद

जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों को 8 से 9 अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटकर भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई है। एहतियाती कदम उठाते हुए दिल्ली मेट्रो के 12 प्रमुख स्टेशनों जैसे-राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस और लोक कल्याण मार्ग के एंट्री-एग्जिट गेटों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। इसके अलावा सेंट्रल दिल्ली में धारा-163 (BNSS) लागू कर किसी भी प्रकार की जनसभा या प्रदर्शन पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है।

गांधी जयंती पर पुलिस स्टेट बनाने का आरोप

हिरासत में लिए जाने के दौरान आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा, क्या गांधी जयंती के दिन इस देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए भी इजाजत लेनी होगी? पूरे शहर को पुलिस स्टेट बनाकर भी सरकार और चुनाव आयोग अपने गलत फैसलों को छिपा नहीं पाएंगे। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि छह दिन पहले अनुमति मांगी गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद जनता आयोग के कामकाज के तरीकों के खिलाफ आवाज उठाने जरूर पहुंचेंगे।

आयोग के भीतर से भी उठे 4 बड़े सवाल

आयोग के भीतर से भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग से 4 मुख्य बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था:-

फॉर्म-6 का विवाद : नए मतदाताओं से पुरानी SIR लिस्ट में परिवार के विवरण मांगने की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए।

डेटा का केंद्रीकरण : राज्यों के बजाए दिल्ली मुख्यालय के पास वोटर डेटा का एक्सेस बढ़ाने की नीति का विरोध हुआ।

पश्चिम बंगाल की 16 लाख अपीलें : बेदखल किए गए नामों को लेकर बिना स्पष्ट अनुमति के लाखों अर्जियां कैसे दाखिल हुईं।

गोवा की तकनीकी खामी : सत्यापन योग्य 97 पात्र नागरिकों का नाम सॉफ्टवेयर एरर के चलते अंतिम मतदाता सूची में शामिल न होना।

चौतरफा दबाव के बाद चुनाव आयोग को पीछे हटना पड़ा

देशभर में हो रहे विरोध और आंतरिक सवालों के बाद चुनाव आयोग को झुकना पड़ा है। आयोग ने घोषणा की है कि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां फॉर्म-6 से वर्ष 2003 की मतदाता सूची से जुड़ी घोषणा की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब नए आवेदकों को माता-पिता या दादा-दादी के पुराने रिकॉर्ड की जानकारी नहीं देनी होगी। वैसे, सामान्य पात्रता जांच पहले की तरह जारी रहेगी।

मुंबई तक फैली विरोध की आंच

चुनाव आयोग के खिलाफ यह गुस्सा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि यदि ज्ञानेश कुमार ने पद से इस्तीफा नहीं दिया तो अक्टूबर के अंत से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।