Supreme Court Hearing On CEC And SIR : भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर शक्तियों के बंटवारे और काम करने के तरीके को लेकर बड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगा है कि उन्होंने आयोग के अन्य दो आयुक्तों की सहमति लिए बिना अपने स्तर पर कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले ले लिए। सुप्रीम कोर्ट इस गंभीर मामले पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ के सामने वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने इस याचिका का जिक्र किया, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।
याचिका में क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
अकेले फैसले लेने का आरोप : याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह का कहना है कि निर्वाचन आयोग में सारी ताकत एक व्यक्ति के हाथ में सिमटती जा रही। कानूनन चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है, जिसमें निर्णय सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए।
बहुमत के नियम की अनदेखी : आयोग में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं। याचिका के मुताबिक किसी भी मुद्दे पर असहमति होने पर फैसला वोटिंग यानी बहुमत से होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
अन्य आयुक्तों की आपत्तियां : याचिका में दावा किया गया है कि 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम-से-कम 14 मौकों पर लिखित असहमति जताई थी। ये आपत्तियां उन फैसलों पर थीं, जो बिना उनकी जानकारी या आयोग की औपचारिक मंजूरी के लागू कर दिए गए।
SIR पर उठते सवाल : याचिकाकर्ता के मुताबिक मतदाता सूची से जुड़े SIR जैसे संवेदनशील फैसले बिना पूरे आयोग की सहमति के लिए गए हैं तो यह सीधे तौर पर बड़ा संवैधानिक उल्लंघन है।
किस अधिकार से लिया फैसला?
याचिका में अदालत से Quo Warranto (अधिकार-पृच्छा) रिट जारी करने की अपील की गई है। इसके जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल पूछा जाएगा कि उन्होंने किस आधार या अधिकार के तहत आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल अकेले किया। साथ ही याचिका में यह मांग भी रखी गई है कि यह साबित होता है कि नियम दरकिनार कर फैसले लिए गए तो ऐसे सभी आदेशों को गैर-कानूनी और अवैध ठहराया जाए। बिना आयोग की पूरी सहमति के चलाए गए SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े सभी निर्देशों को शुरुआत से ही रद्द घोषित किया जाए।