TMC And CPI M news : वर्षों पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दरकिनार कर TMC और CPI M ने चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ एकजुटता का रुख अपनाया है। राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर पैदा विवाद और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बाद दोनों दलों के बीच शीर्ष स्तर पर पहली बार संपर्क हुआ है। सूत्रों के मुताबिक टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी के बीच कॉल पर बातचीत हुई। इस दौरान नेताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग की साख को बनाए रखने के लिए विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की जरूरत पर बल दिया। ममता ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी बात की है। उन्होंने उनसे इंडिया गठबंधन की तुरंत बैठक करने की अपील की।
असाधारण स्थिति में सहयोग की पहल
दरअसल, इस पूरे संवाद की शुरुआत सीपीआईएम महासचिव एमए बेबी के उस पत्र से हुई, जो उन्होंने इंडिया गठबंधन के घटक दलों समेत गैर-बीजेपी विपक्षी पार्टियों को भेजा था। पत्र में चुनाव आयोग के निरंकुश फैसलों और एसआईआर प्रक्रिया के कारण करोड़ों मतदाताओं के मताधिकार पर मंडरा रहे खतरे को लेकर चिंता जताई गई थी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मतभेदों को भुलाकर एक संयुक्त रणनीति बनाने का आग्रह किया था। इसके जवाब में ममता बनर्जी ने सीपीआईएम के रुख का समर्थन करते हुए माना कि देश में एक असाधारण स्थिति निर्मित हो चुकी है। टीएमसी प्रमुख का मानना है कि केवल एक राज्य के स्तर पर लड़ने के बजाय पूरे विपक्ष को मिलकर चुनाव आयोग के खिलाफ ठोस कदम उठाने होंगे।
आयोग के अंदर का मतभेद उजागर
विपक्ष का यह कड़ा रुख एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद और तीखा हुआ है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद उभरे हैं। आयोग के दो वरिष्ठ सदस्यों, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार एसआईआर से जुड़े कई फैसलों पर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनका आरोप था कि ये फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए और प्रक्रियाओं में खामियां थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने आयुक्तों के नोट मिलने की बात स्वीकार की है। मगर, इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। विपक्षी दलों का कहना है कि आयोग ने उठे गंभीर सवालों और गड़बड़ियों का कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।
विपक्ष की प्रमुख मांगें
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाए।
- SIR प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
- उच्चतम न्यायालय की निगरानी में चुनाव आयोग के कामकाज की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
CEC के खिलाफ संसद में नया नोटिस देगा विपक्ष
विपक्षी दलों ने संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नया नोटिस देने का फैसला भी किया है। सीपीआईएम नेता बेबी ने बीआरएस, आम आदमी पार्टी, डीएमके, टीवीके और बीजेडी जैसी अन्य विपक्षी पार्टियों को भी पत्र भेजकर इस साझा लड़ाई में शामिल होने की अपील की है।
राजनीतिक खींचतान और बयानबाजी
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक उथल-पुथल जारी है। राज्य में टीएमसी संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही। दूसरी ओर ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के बाद BJP ने उन पर तीखा हमला बोला है। BJP नेताओं ने ममता बनर्जी के आरोपों को खारिज करते हुए उनके बयानों को राजनीतिक हताशा करार दिया है। तमाम राजनीतिक घमासान के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच छिड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में देश की राजनीति में नया मोड़ ले सकता है।