PM Modi Varanasi Air Show : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आज वाराणसी का आसमान वायु सेना की ताकत, आधुनिकीकरण और तकनीकी हुनर का गवाह बना। विंग्स ओवर गंगा नाम के इस शानदार आयोजन के जरिए वायु सेना ने साबित कर दिया कि वह पारंपरिक हवाई ताकत के साथ आधुनिक युद्ध की हर नई चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। गंगा किनारे हुए इस कार्यक्रम में देश के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों, आधुनिक हथियारों, पायलटों के कमाल के कौशल और थल, जल व वायु-तीनों सेनाओं के बीच का तालमेल एक साथ देखने को मिला। प्रधानमंत्री इस एयर शो में हिस्सा लेने के लिए रोड शो करते हुए नमो घाट तक पहुंचे थे।

नमो घाट पर हुआ आयोजन

वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित इस एयर शो के समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, वायु सेना प्रमुख और कई बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। भारतीय वायु सेना के 94वें स्थापना दिवस के मौके पर हुए इस खास आयोजन में देश की मजबूत हवाई ताकत और भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए हमारी तैयारियों की पूरी झलक साफ दिखाई दी। इस एयर शो का मकसद सिर्फ सामान्य विमानों को उड़ाना नहीं था, बल्कि असली युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करके अपनी आधुनिक सैन्य क्षमताओं को दिखाना था। आज के आखिरी कार्यक्रम में लड़ाकू विमानों की अनोखी फॉर्मेशन, आसमान में नकली जंग का नजारा, आधुनिक सेंसर तकनीक और हवा में दिल दहला देने वाले करतब मुख्य आकर्षण रहे।

12 एयरबेस से आए करीब 100 विमान, तीनों सेनाओं का दिखा परफेक्ट तालमेल

इस बड़े हवाई प्रदर्शन में देश के कुल 12 एयरबेस से लगभग 100 विमानों ने हिस्सा लिया। इनमें खतरनाक लड़ाकू विमान, ताकतवर हेलीकॉप्टर और सामान ढोने वाले परिवहन विमान शामिल थे। इस पूरे अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने मिलकर बहुत ही सटीक तालमेल दिखाया। इसका मुख्य उद्देश्य देश की तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत और अलग-अलग सैन्य उपकरणों के बीच आपसी तालमेल को दुनिया के सामने लाना था।

6 फाइटर जेट्स ने भरी एरोहेड फॉर्मेशन में उड़ान

आज के एयर शो की सबसे बड़ी शान छह आधुनिक लड़ाकू विमानों की एरोहेड फॉर्मेशन रही। इसमें सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 ने एक साथ आसमान में उड़ान भरी। पहली बार ऐसा हुआ जब वायु सेना के इन छह अलग-अलग और सबसे ताकतवर फाइटर जेट्स ने एक साथ मिलकर अपनी ताकत, पायलटों की काबिलियत और जबरदस्त तालमेल का प्रदर्शन किया। इस दौरान विमानों की रफ्तार, एक जैसी फॉर्मेशन बनाए रखने और मिशन के वक्त आपसी समझ पर खास जोर दिया गया। इन विमानों ने असली हथियारों के साथ उड़ान भरी थी।

गंगा के ऊपर नकली हवाई युद्ध, सुखोई ने रोके जगुआर

कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने आसमान में होने वाली असली जंग की रणनीति का लाइव सिमुलेशन भी देखा। दो जगुआर विमानों ने मालवीय पुल के ऊपर बहुत तेज रफ्तार से हमला करने का अभ्यास किया, जबकि दूसरी तरफ एक सुखोई-30 एमकेआई विमान ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोकने का शानदार अभ्यास कर दिखाया। इस अभ्यास के जरिए यह समझाया गया कि जंग के वक्त लड़ाकू विमान दुश्मन के खतरे का तुरंत कैसे जवाब देते हैं और अलग-अलग विमान मिलकर किसी मिशन को कैसे पूरा करते हैं।

8000 फीट की ऊंचाई से इन्फ्रारेड कैमरे में कैद हुए सुखोई के करतब

एयर शो में सुखोई-30 एमकेआई का तेज गति वाला वर्टिकल मैन्यूवर भी देखने लायक था। एक सुखोई ने दर्शकों के ठीक सामने यह खतरनाक करतब दिखाया, वहीं दूसरे सुखोई-30 एमकेआई ने लगभग 8,000 फीट की ऊंचाई से इन्फ्रारेड इमेजिंग पॉड की मदद से इस पूरे प्रदर्शन को रिकॉर्ड किया। इस कला ने यह बता दिया कि आज के समय में लड़ाकू विमानों की उड़ान के साथ-साथ आधुनिक सेंसर और कैमरा तकनीक कितनी अहम भूमिका निभाती है।

पी-8I और मिराज-2000 ने दिखाई ताकत

इस बड़े आयोजन में भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री निगरानी विमान ने भी अहम भूमिका निभाई। इस विमान ने चेन्नई के पास अरक्कोनम से उड़ान भरी, रास्ते में ग्वालियर के ऊपर मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के साथ तालमेल बिठाया और फिर वाराणसी पहुंचकर इस एयर शो का हिस्सा बना। यह गतिविधि इस बात का सबूत थी कि हमारे देश की अलग-अलग सेनाएं और उनके सैन्य प्लेटफॉर्म आपस में मिलकर कितनी आसानी से किसी बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं।

सूर्य किरण और सारंग टीमों के शानदार करतबों के साथ हुआ समापन

इस एयर शो का समापन भारतीय वायु सेना की मशहूर सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के बेहतरीन हवाई करतबों के साथ हुआ। सूर्य किरण टीम ने अपने एकदम सटीक तालमेल और कलाबाजियों से आसमान में रोमांच पैदा कर दिया तो वहीं सारंग टीम के हेलीकॉप्टरों ने अपनी उड़ान भरने की क्षमता और गजब के आपसी समन्वय का प्रदर्शन करके सबका दिल जीत लिया।