इस बार के मौसम ने कुछ अलग ही रुख ले लिया है। सैटेलाइट डाटा में भी बारिश, महासागर और हवाओं में भी बदलाव के कुछ संकेत मिले हैं। कहीं खेत सूखे जा रहे हैं तो कहीं नदियां उफन रही हैं। अल नीनो का ऐसा कहर की उसके कारण 218 जिलों में किसानों की खेती बर्बाद कर दी है। 2026 के मानसून की तस्वीर बहुत ही अजीब है। अल नीनो के कारण भारत के दक्षिण पश्चिमी देशों में मानसून बहुत कमजोर रहा है, जिसके कारण खेती नहीं हो पा रही और महंगाई भी बढ़ने की आशंका लगाई जा रही है। 

क्या है अल नीनो?

अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में उसके पानी के नॉर्मल से ज्यादा गर्म होने की स्थिति होती है। इससे हवाओं के और बारिश के पैटर्न में भी बदलाव आता है। भारत में कठोर अल नीनो ज्यादातर दक्षिण पश्चिमी देशों के मानसून को कमजोर करता है। जिसके कारण कुछ ऐसी स्थिति बन जाती है कि कुछ इलाकों में बारिश का अकाल आ जाता है और वहीं कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी परिस्थितियां पैदा होती हैं। भारत में इससे महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ इलाकों में सूखे का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन अल नीनो का असर हर राज्य पर और हर साल एक जैसा भी नहीं होता।  

क्यों है ये 2026 इतना चर्चित?

मौसम विभाग की हाल की रिपोर्ट डरा देने वाली है। 2026 में इसका जिक्र इतना इसलिए बढ़ चुका है क्योंकि IMD के मुताबिक अल नीनो की क्षमता मानसून के समय काफी बढ़ गई है और इसके कारण इस साल सितम्बर तक बारिश आमतौर से कम हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 से 9 सितम्बर के बीच बारिश लगभग 36% कम रही, जबकि 1 जून से 9 सितम्बर तक बारिश लगभग 15% काम दर्ज हुई। पिछले करीब एक महीने में देश के 200 से ज्यादा जिलों में बारिश इतनी कम हुई है कि वहां सूखे जैसे हालत हो चुके हैं। इनमें से कुछ जिलों को तो उनके हालत के कारण "गंभीर" केटेगरी में डाल दिया है। सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र के मराठवाड़ा - विदर्भ इलाके, गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और मेघालय में देखने को मिल रहा है। 

कुछ इलाकों में बाढ़ की आशंका 

जहां कुछ इलाकों में सूखे की हालत है, वहीं कई इलाकों में बाढ़ जैसी परिस्थितियां नजर आर ही हैं। ऐसी कुछ स्तिथि बन चुकी है कि जैसे मौसम दो टुकड़ों में बंट चुका है। सितम्बर के शुरुआती हफ्ते कई इलाकों में ऐसी हालत देखने को मिली कि वहां बारिश का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। IMD के SPI यानी Standard Precipitation Index के अंतर्गत इन जिलों को मध्य, गंभीर या बहुत ज्यादा सूखे की केटेगरी में बांटा गया है। इस साल 86 जिलों को ज्यादा बारिश वाली केटेगरी में डाला गया है। 

ISRO ने भी दी चेतावनी?

इसरो के EOS-06 यानी की Oceansat-3 सैटेलाइट ने भी महासागर में हो रहे बदलाव के संकेत देखे हैं। अप्रैल से जून के आंकड़ों की तुलना में जून 2026 में इक्वेटर के पास के कुछ हिस्सों में क्लोरोफिल-ए की मात्रा में तेज गिरावट देखने को मिली है। क्लोरोफिल-ए समुद्र में मौजूद फाइटोप्लांकटन और समुद्री बायोलॉजिकल एक्टिविटी का एक बहुत अहम संकेत माना जाता है। इसके साथ ही समुद्र की सतह पर चलने वाली हवाओं की दिशा में भी बदलाव देखा जा रहा है। ईस्टरली हवाएं वेस्टरली हवाओं की दिशा में जाती हुई नजर आ रही हैं। 

अब आगे क्या होगा?

IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, आगे आने वाले दिनों में बिहार, यूपी, बंगाल, झारखंड, ओडिशा, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरयाणा जैसे राज्यों में बारिश की सम्भावना बताई जा रही है। अगर ये बारिश सामान्य हुई तो सूखे इलाकों को थोड़ी राहत की सांस मिलने की उम्मीद है, लेकिन अगर बारिश आमतौर से कम हुई, तो खेती, मिट्टी की नमी और पानी की स्टोरेज जैसी चीजों पर सीधा असर पड़ सकता है।