नेपाल में अगस्त में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों को लेकर सरकार ने आधिकारिक सूची जारी की है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, 32 जिलों के 2,294 नेपाली नागरिकों और सात देशों के 171 विदेशी नागरिकों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। इस तरह सूची में कुल 2,465 लोगों के नाम शामिल हैं। यह सूची 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ के बाद जारी की गई है। इस आपदा में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5,285 लोग लापता बताए गए थे। सरकार ने 5 अक्टूबर को 40 दिनों तक चले खोज और बचाव अभियान को समाप्त कर दिया था। इसके बाद अब राहत के साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है।
रसुवा जिले में सबसे ज्यादा लोग लापता
सरकारी सूची के मुताबिक, नेपाल के रसुवा जिले से सबसे अधिक 1,538 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद सिंधुपालचोक जिले में 219 लोग लापता हैं। यह सूची संबंधित जिलों की आपदा प्रबंधन समितियों से मिली जानकारी और स्थानीय निकायों की सिफारिशों के आधार पर तैयार की गई है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उन्हीं लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनके लापता होने की पुष्टि जिला स्तर पर हुई है। शेष लापता लोगों के बारे में जानकारी मिलने के बाद सूची में संशोधन किया जा सकता है।
सात देशों के 171 विदेशी नागरिक भी लापता
नेपाल की ओर से जारी आंकड़ों में सात देशों के 171 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें मलेशिया और यूक्रेन के 54-54, ऑस्ट्रेलिया के 33, रूस के 11, दक्षिण कोरिया के नौ, जर्मनी के आठ और इटली के दो नागरिक शामिल हैं। इस सूची में फिलहाल भारतीय नागरिकों के नाम शामिल नहीं हैं। NDRRMA ने बताया कि भारतीय दूतावास से अभी तक लापता भारतीय नागरिकों की सत्यापित सूची प्राप्त नहीं हुई है। सूची में आगे जानकारी जुड़ने पर संशोधित विवरण जारी किया जाएगा।
लापता लोगों के परिजनों को सात दिन का समय
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपील की है कि सूची में शामिल कोई व्यक्ति यदि जीवित मिल जाता है या उसके सुरक्षित होने की जानकारी मिलती है, तो वह स्वयं या उसके परिजन सात दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों के पास दावा प्रस्तुत करें। नाम या अन्य विवरण में गलती होने पर भी सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास शुरू हुई बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ के तेज बहाव में मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए थे। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।