दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने के साथ ही ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्त कदम उठाए जाते हैं। इसका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना और लोगों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाना है। GRAP को चार चरणों में विभाजित किया गया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर में गिरावट के साथ हर अगले चरण में पाबंदियां और सख्त कर दी जाती हैं। नवंबर की शुरुआत में दिल्ली की हवा खराब होने के बाद पहले GRAP-1 और GRAP-2 लागू किए गए। इसके बाद 6 नवंबर को GRAP-3 की पाबंदियां भी लागू कर दी गईं।

क्या है GRAP और कैसे काम करता है?

GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए लागू की जाने वाली एक आपातकालीन कार्ययोजना है। इसे वायु गुणवत्ता के आधार पर लागू किया जाता है। दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) इसकी निगरानी करता है। इसके तहत प्रदूषण बढ़ने पर निर्माण कार्य, वाहनों, उद्योगों और दूसरी गतिविधियों पर अलग-अलग स्तर की रोक लगाई जाती है।

GRAP की चारों स्टेज और AQI का स्तर

स्टेज-1: खराब हवा (AQI 201 से 300)

जब AQI 201 से 300 के बीच पहुंचता है, तब GRAP का पहला चरण लागू होता है। इस दौरान सड़क की धूल कम करने, खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए जाते हैं। सड़कों की नियमित सफाई और पानी का छिड़काव भी कराया जाता है।

स्टेज-2: बहुत खराब हवा (AQI 301 से 400)

AQI के 301 से 400 के बीच पहुंचने पर दूसरा चरण लागू होता है। इसमें पहले से जारी पाबंदियों के साथ अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं। सड़कों की मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है। पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को मजबूत करने जैसे उपाय भी किए जाते हैं। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी सख्ती की जाती है।

स्टेज-3: गंभीर हवा (AQI 401 से 450)

इस चरण में प्रदूषण रोकने के लिए ज्यादा सख्त कदम उठाए जाते हैं। गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रोक लगा दी जाती है। दिल्ली और चुनिंदा NCR जिलों में BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल चार पहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियों पर भी रोक लगती है। इसके अलावा, पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए स्कूलों में हाइब्रिड पढ़ाई की व्यवस्था की जा सकती है। राज्य सरकारें सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देने पर भी फैसला कर सकती हैं।

स्टेज-4: बेहद गंभीर हवा (AQI 450 से अधिक)

GRAP का चौथा चरण सबसे सख्त होता है। इसे लागू होने पर भारी वाहनों की आवाजाही पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं। आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट मिल सकती है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, औद्योगिक इकाइयों और निर्माण गतिविधियों पर और कड़ी कार्रवाई की जाती है। जरूरत पड़ने पर स्कूलों को बंद करने और ऑनलाइन कक्षाएं चलाने जैसे फैसले भी लिए जा सकते हैं।

GRAP-3 लागू होने पर दिल्ली-NCR में क्या बदला?

6 नवंबर को CAQM ने दिल्ली-NCR में GRAP-3 लागू किया था। इसके तहत गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रोक लगाई गई है। दिल्ली के साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल चार पहिया वाहनों पर पाबंदी लगाई गई है। प्राथमिक कक्षाओं के लिए हाइब्रिड पढ़ाई का विकल्प दिया गया है। वहीं, कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

AQI की किस श्रेणी में कितनी होती है परेशानी?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) हवा की गुणवत्ता को छह श्रेणियों में बांटता है। AQI के स्तर के आधार पर हवा की गुणवत्ता को छह श्रेणियों में बांटा गया है। 0-50 तक अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब और 401-500 गंभीर श्रेणी मानी जाती है। AQI का स्तर जितना अधिक होता है, वायु प्रदूषण और उससे जुड़ा स्वास्थ्य जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।