18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक जीत का गवाह बना। ब्रिक्स के समापन सत्र में सभी सदस्य देशों की सहमति से दिल्ली डिक्लेरेशन पारित कर दिया गया। इस 140 अहम बिंदुओं वाले इस साझा घोषणापत्र में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भर्त्सना की गई।
भारत की कूटनीतिक जीत
इस घोषणापत्र के 40वें बिंदु में साफ लिखा गया है –
“हम आतंकवाद के किसी भी कृत्य की निंदा करते हैं। इसे आपराधिक और किसी भी परिस्थिति में अनुचित मानते हैं, चाहे उसके पीछे कोई भी मकसद हो, कहीं भी हो या किसी के द्वारा किया गया हो। हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।”
चीन, रूस समेत सभी ब्रिक्स देशों ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की है। घोषणापत्र में कहा गया है कि आप किसी का धर्म देखकर हत्या नहीं कर सकते। आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस और सभी रूपों से मुकाबला करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
आतंकवाद विरोधी कार्य दल पर जोर
जहां घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा को ब्रिक्स के मंच से स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के लिए संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, अहम बात यह भी है कि इस डिक्लेरेशन में कॉउंटर टेररिज्म वर्किंग ग्रुप की गतिविधियों को औऱ मजबूत करने पर भी ज़ोर दिया गया है। इससे पहले ब्रिक्स सदस्य देशों का एक आर्थिक गठबंधन माना जाता था। लेकिन अब ब्रिक्स देश आतंकवाद की रोकथाम में मिल कर काम करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन BRICS इंडिया 2026 का स्पष्ट संदेश देते हुए कहा –“भविष्य अगर हमारा साझा है तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए।”
घोषणापत्र में अमेरिका को संदेश
ब्रिक्स घोषणापत्र में इक तरफा आर्थिक औऱ सेकेंडरी प्रतिबंधों की भी आलोचना की गई है। डिक्लेरेशन में एकतरफा टैरिफ समेत संरक्षणवादी तरीकों पर सवाल खड़े किए गए है। जाहिर है कि इसके माध्यम से अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर इशारे में हमला किया गया है।
चीन-भारत संबन्धों में सुधार की उम्मीद
ब्रिक्स सम्मिट से परे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी की 50 मिनट तक अलग बैठक हुई। इस बैठक में मोदी ने सीमा विवाद की ओर संकेत करते हुए कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता से ही आपसी संबन्धों में सुधार और विकास संभव है। उन्होंने साफ कहा कि मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए। पीएम ने तीन म्यूचुअल्स का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों को परस्पर सम्मान,संवेदनशीलता औऱ आपसी हितों का खयाल रखना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग औऱ समर्थन के लिए शी जिनपिंग का आभार व्यक्त किया।वहीं शी जिनपिंग ने कहा कि चीन हमेशा से भारत से बेहतर संबन्धों का हामी रहा है। उन्होने कहा कि हालांकि दोनों देशों की अलग अलग परिस्थितियां हैं लेकिन फिर भी हम एख दूसरे से काफी कुछ सीख सकते हैं।
चीन से व्यापार असंतुलन पर भी चर्चा
महत्वपूर्ण बात यह है कि गलवान में सैन्य झड़प के बाद चीन से आयात बढ़ा है। 2020-21 में चीन से आयात करीब 65 अरब डॉलर का होता था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़ कर 132 अरब डालर तक पहुंच गया। वहीं भारत से सिर्फ 19.47 अरब डॉलर का ही निर्यात होता है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच भारतीय उत्पादों के लिए चीन के बाज़ार उपलब्ध कराने औऱ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर भी सार्थक चर्चा हुई।
वैश्विक संगठनों में सुधार पर जोर
ब्रिक्स डिक्लेरेशन में विश्व व्यापार संगठन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया। पीएम मोदी ने कहा कि अब इसे और टाला नहीं जा सकता। वहीं ब्रिक्स देशों ने भारत और ब्राजील को भी यूएनएससी की स्थाई सदस्यता की हिमायत की।
युद्ध और परमाणु खतरे पर भी चिंता
पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयास तेज़ करने पर जोर दिया गया। घोषणापत्र में कहा गया कि संवाद औऱ कूटनीति से विवादों को सुलझाया जाना चाहिए।
फिलीस्तीनः द्विराष्ट्र फार्मूले का समर्थन
महत्वपूर्ण बात यह है कि डिक्लेरेशन में युद्धरत देशों से गाजा में युद्धविराम जारी रखने और मानवीय सहायता निर्बाध रूप से पहुंचाने में सहयोग की अपेक्षा की गई। घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से द्विराष्ट्र फार्मूले के आधार पर समाधान की बात कही गई। साथ ही फिलीस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता देने की अपील जारी की गई है।
ब्रिक्स पर डाक टिकट
ब्रिक्स की 20वीं मौके को और खास बनाते हुए दो डाक टिकट जारी किए गए हैं...जाहिर है ये किसी भी सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है कि वो कितने लंबे वक्त तक दुनिया के तमाम देशों और उनसे जुड़ी बातों के साथ अपना सरोकार बनाए रखता है...
कुल मिलाकर दिल्ली डिक्लेरेशन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा सबसे प्रमुख संदेश है। इसके साथ प्रधानमंत्री मोदी के साझा भविष्य वाले संदेश ने पूरे सम्मेलन की थीम तय कर दी है।