नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने एक बार फिर भारत और रूस की मजबूत दोस्ती को दुनिया के सामने रख दिया है। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, रक्षा, कारोबार और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। दोनों देश आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।

रूस से तेल खरीदना बना सबसे बड़ा मुद्दा 

अमेरिका का मानना है कि रूस को तेल बेचने से होने वाली कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया जा रहा है। इसी वजह से अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भी लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत और रूस के बीच बढ़ती नजदीकी के बीच कच्चे तेल की खरीद भी एक अहम मुद्दा बन गई है। हालांकि, भारत लगातार कहता रहा है कि तेल खरीदने का फैसला देश की ऊर्जा जरूरतों, बाजार की स्थिति और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाता है।

100 फीसदी टैरिफ लगाने की मांग 

भारत और रूस की दोस्ती अमेरिका को ज्यादा ही खटकने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दोस्ती से अमेरिका में हलचल मच गई। इसी बीच अमेरिकी संसद में रूस प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल में नया संशोधन प्रस्ताव सामने आया है। इसमें भारत के साथ रूस के बड़े व्यापारिक देशों के नाम सीधे शामिल करने की मांग की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सके। लेकिन अभी ये बास एक प्रस्ताव है, लागू किया गया टैरिफ नहीं। यह पूरा मामला अभी अमेरिकी संसद की प्रक्रिया में है। खास बात ये है कि एक दूसरे अमेरिकी सांसद ने टैरिफ वाले नियम को ही हटाने का प्रस्ताव भी दिया है। यानी अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। 

India-US trade को बड़ा झटका

अगर ये फैसला लागू होता है तो भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लग सकता है। ये दोनों देशो के लिए जरुरी इसलिए भी है क्योंकि दोनों देशो के बीच ट्रेड डील आगे बढ़ाने की कोशिश चल रही है। इससे India-US ट्रेड को बड़ा झटका लगने की आशंका है। अब नजर इस बात पर होगी कि अमेरिका की संसद इस बिल पर क्या फैसला लेती है।