CJP On Gyanesh Kumar : राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले में सरकार पर दबाव बनाकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा दिलवाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने आज दिल्ली में कहा, ज्ञानेश कुमार ने 48 घंटों में इस्तीफा नहीं दिया तो देशभर में चुनाव आयोग के खिलाफ मुहिम चलाएंगे। उसके बाद दिल्ली में जंतर-मंतर 2.O भी चलाया जाएगा। CJP ने चुनाव आयोग और सरकार के सामने 3 मांगें रखीं हैं। CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके और सह संयोजक सौरभ दास-आशुतोष रांका ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान ज्ञानेश कुमार, भाजपा, केंद्र सरकार और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट पर भी प्रहार किया।
सीजेपी की मागें
ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो। उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा दायर हो। यह जांच होनी चाहिए कि उन्हें कौन आदेश दे रहा था। आगामी चुनावों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। जनवरी 2024 की वोटर लिस्ट बहाल की जाए। SIR प्रक्रिया रोकी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट SIR से जुड़ी फाइलों को जब्त करे। साथ ही 2023 के कानून उस कानून को वापस लिया जाए, जो चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से संरक्षण देता है। नया कानून बनाया जाए, जिसमें सिविल सोसाइटी की भागीदारी हो।
इस्तीफा नहीं दिया तो...
दीपके ने कहा, 48 घंटे में ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो उनकी पार्टी देशव्यापी आंदोलन चलाएगी। दिल्ली के जंतर-मंतर से तब तक नहीं उठेगी, जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते। यह भी कहा कि हम सभी शहरों में जाएंगे और लोगों को जागरूक करेंगे, जैसे जंतर-मंतर आंदोलन से पहले हम देशभर में गए थे, उसी तरह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में जाएंगे। अभी भी जब हम जा रहे तो लोग कह रहे कि सबसे बड़ा मुद्दा वोट की चोरी है। चुनाव में गड़बड़ी है। लोगों में पहले से गुस्सा भरा हुआ है। अच्छा होगा कि वह इस्तीफा दे दें। दीपके ने कहा कि जंतर-मंतर 2.0 होगा और दिल्ली में आंदोलन की रूपरेखा साझा की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त देश के सबसे बड़े गद्दार: दीपके
अभिजीत दीपेक ने कहा, जो एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट से साबित होता है कि जो मुख्य चुनाव आयुक्त देश के सबसे बड़े गद्दार हैं। उनको तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। वह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। लोकतंत्र का मतलब था-जनता सरकार चुनेगी। मगर, ज्ञानेश कुमार जबसे सीईसी बनी, तब से सरकार तय कर रही कि कौन वोट करेगा कौन नहीं।