Delhi-NCR Air Pollution News : दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में मौसम के करवट लेते प्रदूषण का जहर तेजी से घुलने लगा है। दिन में तेज धूप और रात में हल्की सर्दी के बीच हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। इससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा। दरअसल, दिल्ली-NCR के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के आंकड़े को पार कर चुका है। जो खराब श्रेणी है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का कहना है कि कई साल में यह पहला मौका है, जब इस सीजन में इतनी देरी से ग्रैप लागू किया गया है।

बिगड़ते हालात की वजह

मौसम विभाग के मुताबिक आगामी दिनों में रात का तापमान गिरकर 18 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। तापमान कम होने और शाम ढलते हवा की रफ्तार सुस्त पड़ने के चलते गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और धूल जमीन के करीब ठहर जाते हैं। CPCB के आंकड़ों के अनुसार पूसा, पंजाबी बाग और ग्रेटर नोएडा (नॉलेज पार्क) जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण का लेवल चिंताजनक है। 

GRAP-1 लागू होने से क्या-क्या बदल गया है?

प्रदूषण नियंत्रित करने को ग्रैप का पहला चरण लागू किया गया है। इसके तहत निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया गया है। होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट के तंदूर में कोयला या लकड़ी जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव और मशीनों से सफाई का काम तेज कर दिया गया है। कोई खुले में कचरा या सूखे पत्ते जलाते पकड़ा गया, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

सरकार का नया एक्शन प्लान

इस संकट से निपटने को पर्यावरण मंत्रालय अंतर्गत 30 एजेंसियां साथ मिलकर मैदान में उतरी हैं।

पार्किंग फीस : 1 नवंबर से मेट्रो को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर पार्किंग फीस को दोगुना करने की तैयारी चल रही है।

ट्रैफिक सुधार : सड़क पर लगने वाले जाम और धूल से राहत पाने के लिए सड़कों की मरम्मत कराई जा रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की मदद ली जा रही है।

नियम तोड़ा तो सीधे 10 हजार रुपए का चालान

प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने सड़कों पर चेकिंग अभियान तेज कर दिया है। यदि आपकी गाड़ी का पीयूसी (PUCC) सर्टिफिकेट वैध नहीं है या खत्म हो चुका है, तो पुलिस बिना किसी नरमी के सीधा 10 हजार रुपये का भारी-भरकम चालान काटेगी।

GRAP-1 के तहत अन्य जरूरी प्रावधान और निर्देश

धूल नियंत्रण : निर्माण तथा ध्वस्तीकरण (C&D) सामान या कचरे को ठीक से स्टोर एवं ढंकना जरूरी है। इनका परिवहन ढके वाहनों में होना चाहिए तथा एंटी-स्मॉग गन और पानी के छिड़काव के मानकों का कड़ाई से पालन हो।

500 वर्गमीटर से बड़े प्रोजेक्ट : जिन निर्माण प्रोजेक्ट्स का प्लॉट साइज 500 वर्गमीटर या उससे ज्यादा है और वे राज्य या दिल्ली सरकार के वेब पोर्टल पर रजिस्टर्ड नहीं हैं या रिमोट मॉनिटरिंग के नियमों को पूरा नहीं करते, वहां सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी।

कचरे का उठाव : तय डंप साइट्स और औद्योगिक क्षेत्रों से म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (MSW), C&D वेस्ट, इंडस्ट्रियल और खतरनाक कचरे का नियमित रूप से उठान हो, ताकि कोई भी कचरा खुले मैदानों में अवैध रूप से न फेंका जाए।

सड़क सफाई : सड़कों की नियमित रूप से यांत्रिक सफाई और पानी का छिड़काव किया जाए। सएकत्रित धूल का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित लैंडफिल्स में निपटान हो।

प्रोजेक्ट्स में धूल रोकथाम : सड़क बनाने, चौड़ी करने, मरम्मत करने और रखरखाव के सभी कामों में एंटी-स्मॉग गन, पानी के छिड़काव और डस्ट सप्रेशन उपायों को तेजी से लागू किया जाए।

खुले में जलाने पर रोक : बायो-मास और म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट को खुले में जलाने पर सख्त पाबंदी है और नियम तोड़ने वालों पर अधिकतम जुर्माना लगाया जाएगा।

लैंडफिल निगरानी : इस बात की कड़ी निगरानी रखी जाए कि लैंडफिल या डंप साइट्स पर आग लगने या कचरा जलने की कोई घटना न हो।

ट्रैफिक मैनेजमेंट : ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने के लिए भीड़-भाड़ वाले चौराहों और भारी ट्रैफिक वाले रास्तों पर पर्याप्त संख्या में कर्मियों को तैनात किया जाए।

पीयूसी और पॉल्यूशन चेकिंग : गाड़ियों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUCC) के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। अत्यधिक धुआं छोड़ने वाली या प्रदूषित गाड़ियों को तुरंत जब्त किया जाए और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए।

कमर्शियल वाहनों का डायवर्जन : दिल्ली में आने वाले गैर-जरूरी और गैर-निर्धारित ट्रक ट्रैफिक को पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के रास्ते से ही मोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।