अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना वीकएंड हॉलीडे बीच में छोड़ कर व्हाइट हॉउस पहुंच गए हैं। ईरान ने युद्ध समाप्त करने की सात शर्तें अमरीका के सामने रखी है। साथ ही समझौता न होने की सूरत में नतीजे भुगतने को तैयार रहने को कहा है। अमरीका ने इसी बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव के मद्देनज़र अमेरिकी डिप्लोमेटिक मिशनों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। ईराक, बहरीन,ओमान,सऊदी अरब, ईऱान,कतर, लेबनान, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अपने नागरिकों को सावधानी बरतने का निर्देश दिया है।

ईऱान ने जारी किया CODE-100

वहीं ईरान ने भी उच्चतम हाई अलर्ट कोड 100 जारी कर दिया है। CODE-100 को ईऱान में सैन्य तैयारियों के अलर्ट के रूप में जाना जाता है। ईऱान के कोड 100 अलर्ट के बाद इज़रायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू अपनी अमरीका यात्रा बीच में छोड़ कर वापस तेल अवीब लौट आए हैं। वहीं, कुछ जानकारों का ये भी मानना है कि नेतन्याहू की अमरीका यात्रा से मिले संकेत के आधार पर माना जा रहा है कि अमरीका-इज़रायल ईरान पर अब तक के सबसे बड़े हमले की तैयारी में है। ईरान का कोड 100 जारी करना भावी संघर्ष की ओर इशारा कर रहा है।

ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं। तेहरान ने ये शर्तें कतर के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाई हैं। ईरान की ओर से कहा गया है कि अगर उसकी मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो वह आगे की सैन्य स्थिति के लिए भी तैयार है। अब ईरान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार है। 

कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचा संदेश

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने बताया कि तेहरान की कतर के साथ बातचीत जारी है। उनके मुताबिक, कतर ने ईरान की शर्तों को अमेरिका तक पहुंचा दिया है और अब अगला जवाब वॉशिंगटन की ओर से आना है। रेजाई ने यह भी कहा कि ईरान ने बातचीत को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उनके अनुसार, अमेरिका को इन शर्तों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

युद्ध रोकने से लेकर फ्रीज धन जारी करने तक मांग

ईरान की सभी सात शर्तों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।रेजाई ने कुछ प्रमुख मांगों का जिक्र किया है, जिनमें सभी मोर्चों पर युद्ध को रोकना, विदेशों में जो ईरानी रकम रोकी गई है उसे जारी करना और समुद्री नाकाबंदी को पूरी तरह समाप्त करना शामिल है। ईरानी अधिकारी ने अमेरिका को यह भी संदेश दिया है कि सैन्य दबाव के जरिए तेहरान से अपनी शर्तें मनवाना आसान नहीं होगा। रेजाई के मुताबिक, अगर ईरान की मांगें स्वीकार नहीं की जाती हैं तो उनका देश आगे की लड़ाई के लिए तैयार है। 

कतर और पाकिस्तान बातचीत बहाल कराने में जुटे 

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और मिडिल ईस्ट में शांति के प्रयासों में कतर और पाकिस्तान भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों देश दोनों पक्षों के बीच संपर्क बहाल कराने की कोशिश कर रहे हैं। क्षेत्र के कुछ अन्य देश भी संघर्ष को खत्म कराने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में लगे हैं। इस बीच ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियों को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी सशस्त्र बलों के लिए उच्चतम अलर्ट स्तर 'कोड 100' जारी किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है।

ईरान को अमेरिकी हमले की आशंका

मोहसिन रेजाई ने अमेरिका की तरफ से दोबारा सैन्य कार्रवाई की आशंका जताई है। उनके अनुसार, ईरान ने पिछले संघर्षों के अनुभवों के आधार पर अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है। रेजाई ने यह भी कहा कि किसी नए हमले की स्थिति में ईरान की जवाबी कार्रवाई का दायरा बड़ा हो सकता है। उनके मुताबिक, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और अमेरिकी कारोबारी हित भी इसकी जद में आ सकते हैं। यह बयान ईरानी अधिकारी का दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।

परमाणु नीति पर भी ईरान ने दिया बयान

मोहसिन रेजाई ने ईरान के परमाणु एजेंडे को लेकर अपनी बात सामने रखी है। उनका कहना है कि फिलहाल तेहरान की NPT से बाहर निकलने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका की मौजूदा नीतियां ईरान को आगे चलकर इस विकल्प पर विचार करने के लिए मजबूर कर सकती हैं। रेजाई के मुताबिक, परमाणु नीति में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। अब निगाहें अमेरिका के अगले कदम पर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत की शुरुआत हो पाती है या नहीं?