कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को राजनीतिक बहस में घसीटना उचित नहीं है। उन्होंने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए खरगे से अपने शब्दों पर खेद जताने की अपील की।
गडकरी ने कांग्रेस से मांगा जवाब
नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पटना में प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर खरगे ने जो टिप्पणी की, उसकी जितनी निंदा की जाए, कम है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसमें भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनी रहनी चाहिए। गडकरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर पहले भी इस तरह की टिप्पणियां सामने आती रही हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस को इस मामले पर विचार करना चाहिए और खरगे को अपने शब्दों पर खेद जताना चाहिए।
पटना में क्या हुआ था?
यह विवाद रविवार, 25 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। भाषण देते समय खरगे चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं। इस पर खरगे ने जवाब दिया, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनकी इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम स्थल पर हंगामा हो गया।
टिप्पणी पर भाजपा का देशव्यापी विरोध
खरगे के बयान के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना की और उनसे माफी मांगने की मांग की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी टिप्पणी पर आपत्ति जताई। भाजपा ने सोमवार को देशभर में अपने प्रदेश मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। दूसरी ओर, कार्यक्रम में टिप्पणी करने वाले व्यक्ति संतोष कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी बात को अधूरा सुना गया और गलत समझ लिया गया। उन्होंने दावा किया कि वह यह कह रहे थे कि विद्रोह के बिना नरेंद्र मोदी सत्ता से नहीं हटेंगे। इस स्पष्टीकरण के बाद भी बयान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।