अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक में ईरान से जुड़ा मुद्दा भी चर्चा में आ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच वॉशिंगटन की नजर चीन की भूमिका पर है। जानकारी के मुताबिक, ट्रंप चीन से ईरान के मामले में अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश करें।
ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश में अमेरिका
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात ऐसे समय होने जा रही है, जब अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, चीन के ईरान के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध हैं। एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में चीन ने ईरानी मूल के करीब 18 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया था।
ईरान को लेकर चीन पर अमेरिकी नजर
अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध अभियान की शुरुआत भी की गई है। ऐसे में चीन और ईरान के बीच जारी आर्थिक संबंध वॉशिंगटन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकते हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रंप शी से ईरान के साथ जारी संघर्ष को खत्म कराने में मदद करने, मध्य पूर्व में समुद्री मार्गों को खोलने और ऊर्जा बाजार से जुड़े कदम उठाने का आग्रह कर सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि चीन अपने तेल आयात और अन्य आर्थिक नीतियों में केवल अमेरिकी आग्रह के आधार पर बड़ा बदलाव करेगा, इसकी संभावना स्पष्ट नहीं है।
चीन पर सीधे दबाव की स्थिति?
ईरान के साथ चीन के संबंधों को लेकर अमेरिका और बीजिंग के बीच पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं। हाल में चीनी संस्थाओं द्वारा ईरान को कथित तौर पर सैन्य ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, ट्रंप ने इन रिपोर्टों को लेकर सार्वजनिक रूप से नरम रुख अपनाते हुए उन्हें खारिज किया था। विश्लेषणों में कहा गया है कि चीन के पास ईरान पर कुछ प्रभाव है, लेकिन बीजिंग अपनी विदेश नीति और आर्थिक हितों को देखते हुए अमेरिकी दबाव के अनुरूप कदम उठाएगा या नहीं, यह बैठक में महत्वपूर्ण सवाल रहेगा। 24 सितंबर को प्रस्तावित ट्रंप-शी बैठक में ईरान के अलावा व्यापार, ऊर्जा और वाशिंगटन-बीजिंग के रिश्तों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।